नागरी प्रचारिणी सभागार में आयोजित सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जयंती अवसर पर मुख्य अतिथि ने उनको माल्यार्पण किया।
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देवरिया। नागरी प्रचारिणी सभा में कवि निराला के जीवन पर प्रकाश डाला गया। इसमें निराला को साहित्य में नवजीवन मूल्यों की स्थापना के कवि रहें। हिंदी कविता में बसंत के अग्रदूत थे। इनके कविताओं को जीवन उतारने की जरूरत है।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष श्रीकृष्ण चंद्रलाल श्रीवास्तव ने कहा कि निराला के जीवन और साहित्य में कोई फर्क नहीं है। पूरे जीवन वंचितों दलितों, उपेक्षितों और कमजोरों के प्रति आवाज उठाते रहे। निराला पुरातन पड़ चुके जीवन, मूल्यों, रूढ़ियों और परंपराओं का विरोध कर नए आकाश, नए धरती, नए पुष्प वृक्ष और नवल बसंत की अपेक्षा की। सभा उपाध्यक्ष प्रेमशीला शुक्ल ने कहा कि निराला का जीवन हिंदी कविता में वसंत के रचनात्मक प्रतिस्पर्धा कर किसी महान व्यक्ति से बड़ी लकीर खींच दें। इस दौरान सुधाकर मणि तिवारी, गोपाल कृष्ण सिंह, वीरेंद्र तिवारी, शकुुंतला दीक्षित, अनुराधा सिंह, डॉ. प्रिया मिश्रा मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन इंद्र कुमार दीक्षित ने किया।