देवरिया। भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें जेल में उमड़ पड़ीं। तीखी धूप और बारिश की परवाह नहीं रही। घंटों इंतजार और जांच-पड़ताल का तामझाम अलग से रहा। गेट पर पहुंचीं तो कतार में खड़ा होना पड़ा। बारिश से बचने के लिए पोर्च के नीचे पहुंचीं। हथेली पर मोहर लगने के बाद जेल के अंदर प्रवेश किया। मलाल तो रहा कि भाई जेल में कैद है। बहनों ने कहा कि न्यायिक हिरासत से जरूर बाहर निकलेगा। उधर, बहन और परिवारवालों को देख कर खुश हो गए। अपने हाथों से भाइयों को मिठाई खिलाई।
कसया की पूजा भाई से मिलने आईं थीं। बेटे के साथ आईं पूजा ने बताया कि भाई बंद है। रक्षाबंधन पर बहुत याद आती है। भाई का उपहार नहीं भूलता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि भाई जल्द बाहर निकले। कुशीनगर की शिवानी भाई को राखी बांधने आईं थीं। उन्होंने बताया कि जब हम छोटे थे तो भाई रक्षाबंधन पर ढेरों उपहार देते थे। इस बार हम लोग खुद भाई को राखी के साथ उपहार देंगे। वजह भाई जेल में है तो कैसे उपहार देगा। चकरवा की प्रिया सिंह मम्मी के साथ मामा से मिलने आईं थीं। उन्होंने बताया कि मम्मी ने जेल जाकर राखी बांधने की बात कही तो मैंने भी कहा कि मैं भी चलूंगी, बस मम्मी के साथ चली आई हूं। सुकई परसिया की सपना सिंह दोनों बहनों के साथ भाई से मिलने आईं थीं। रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधा करती हूं। भइया उपहार भी देते थे। उम्मीद है भाई जल्द जेल से बाहर निकलेगा। उसरा टोला-सोनाड़ी की रिमझिम चौहान भाई से मिलने आई थीं। दिव्यांग रिमझिम ने बताया कि रक्षाबंधन है। राखी बांधना है, ऐसे में जेल में मिलने आ गई हूं। भइया के लिए पसंदीदा पकवान भी लेकर आई हूं।