सुधीर श्रीवास्तव
देवरिया। बारिश शुरू होते ही नदी के किनारे बसे लोग 1998 की बाढ़ याद कर सिहर उठते हैं। उस साल बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई थी कई लोग बेघर हो गए थे। कई गांव घाघरा, सरयू और राप्ती में विलीन हो गए थे। बरहज का कूरह परसिया गांव घाघरा की कटान के कारण 2015 में नदी में समा गया। इस गांव के लोग कई साल तक पास के ही प्राथमिक विद्यालय में विस्थापितों की तरह जिंदगी गुजारी। विधानसभा चुनाव के दौरान इन्हें दूसरी जगह पर बसाया गया। कुछ ऐसा ही हाल रुद्रपुर के दोआब और कछार इलाके के लोगों की है। बाढ़ आने पर इन्हें रात तटबंध पर गुजारनी पड़ती है। हर साल बाढ़ की रोकथाम के दावे किए जाते हैं, लेकिन नदियों के उफनते ही सारे दावे फेल हो जाते हैं।
बाढ़ पूर्वांचल के लिए अभिशाप बन चुका है। जब भी बाढ़ आता है देवरिया के तीन तहसील रुद्रपुर, भाटपाररानी और बरहज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। भाटपाररानी में छोटी गंडक और खनवा नदी बहती है तो रुद्रपुर में गौरा और राप्ती। बरहज में घाघरा और सरयू नदी का संगम हो जाता है, इसलिए वहां संगम तट है। पहाड़ों पर यानी नेपाल में अधिक बारिश होने पर इससे सटे जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। क्योंकि नेपाल अपनी नदियों का पानी छोड़ देता है। भाटपाररानी में 19930 1995 और 2003 में बाढ़ कहर बरपा चुका है। 1995 की बाढ़ सबसे भीषण बाढ़ थी। तब 250 गांव तबाह हुए थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मानसून से पहले तटबंधों की मरम्मत और कट को भरने का निर्देश दिया था। मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन अब तक तटबंधों की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो पाया है। गांववालों का कहना है कि बारिश आते ही रतजगा हो जाता है। रुद्रपुर तहसील के 116 गांव बाढ़ के दायरे में आते हैं। इनमें दोआब के 52 और कछार के 64 गांव शामिल हैं। 1998 और 2001 में इस क्षेत्र में बाढ़ कहर बरपा चुका है।
ये गांव नदी में हो चुके हैं विलीन
बाढ़ के कहर में दर्जनों गांव नदियों में विलीन हो चुके हैं। बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा आफत रुद्रपुर और बरहज में नदी के किनारे बसे गांवों पर आती है। रुद्रपुर का करहकोल, मांझा नारायण, पांडेय बाजार हाटा, पांडेय मांझा राजभर, गायघाट आदि गांव राप्ती नदी में समा चुके हैं। पिंडरी, जगत मांझा, दलपतपुर, नारायणपुर गांव भी आंशिक रूप से प्रभावित हैं।
बाढ़ कंट्रोल रूम के पास नहीं है तटबंधों का ब्योरा
बाढ़ पर नजर रखने के लिए भले ही सिंचाई विभाग के कार्यालय में कंट्रोल रूम बना दिया गया है, लेकिन इसके पास जिले में कितने तटबंध हैं, उसके वर्तमान हालात क्या हैं, इसका ब्योरा नहीं है। कंट्रोल रूम के फोन नंबर 05568-222379 पर जब जिले के नदियों के जलस्तर और तटबंधों के बारे में पूछा गया गया तो फोन उठाने शख्स का बेहद रूखा जबाव था। उसने बताया कि तटबंधों का रिकॉर्ड नहीं है। अधिकारी ही इस बारे में जानकारी दे पाएंगे।