देवरिया। मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ वायरल बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। इसकी चपेट में सर्वाधिक बच्चे और किशोर आ रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला अस्पताल में 50 बेड बढ़ा दिया गया हैं। बावजूद मरीजों को बेड नहीं मिल रहा है। चिल्ड्रेन और पीआईसीयू वार्ड में एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया है। वहीं इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कुर्सी पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
210 बेड वाले जिला अस्पताल पिछले एक सप्ताह से मरीजों की संख्या में इस कदर इजाफा हुआ है कि बेड कम पड़ गया है। इसमें सर्वाधिक मरीज पेट दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त के आ रहे हैं। 20 बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार से पीड़ित 43 बच्चों को भर्ती किया गया है। एक बेड पर दो से तीन बच्चों को रखा गया है। 15 बेड के पीआईसीयू वार्ड में 20 बच्चे भर्ती हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल के ओपीडी में 1874 मरीजों ने इलाज के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इमरजेंसी में भी मरीजों का तांता लगा था। इमरजेंसी में आए खिरसर गांव निवासी सुभाष यादव कोइरीगांवा निवासी रामदास समेत चार मरीजों को कुर्सी पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने से जिला अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। बेड नहीं होने के कारण मरीज निजी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की ओर रुख कर रहे हैं। जिला अस्पताल पर भीड़ बढ़ने की वजह ग्रामीण क्षेत्र के पीएचसी पर डॉक्टरों की कमी बताई जा रही है। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। 50 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था अस्पताल में किया गया है। बावजूद इसके बेड की कमी पड़ जा रही है।
-बेटी अंबिका को लेकर चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती फुलवरिया लच्छी गांव निवासी राजू का कहना है कि वार्डों में भर्ती मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी रात को सिस्टर के जिम्मे रहता है, लेकिन वह लापरवाही बरत रही हैं। डॉक्टर सिर्फ एक बार सुबह राउंड पर आते हैं।
उमानगर निवासी वीरेंद्र की बेटी रोशनी तीन दिन से चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती है। इनका कहना है कि रात को सिस्टर अंदर से फाटक बंदकर सो जाती हैं। दिक्कत होने पर फाटक नहीं खोलती हैं और बार-बार आवाज देने पर मेडिकल कॉलेज रेफर करने की धमकी देती हैं।
यह है वॉयरल फैलने का कारण
प्रदूषित जल और भोजन का सेवन। वायु के जरिए सूक्ष्म कणों का भीतर जाना। वायरल बुखार बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक संक्रमित होता है, जिससे यह बुखार एक साथ कई लोगों को हो जाता है। बच्चे को होने वाला फीवर लापरवाही करने पर खतरनाक रूप में परिवर्तित हो जाता है। मौसम में आए बदलाव की वजह से यह बुखार होता है। वायरल बुखार इम्यूनिटी सिस्टम (प्रतिरोधक क्षमता) के कमजोर होने की वजह से होता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
बदलते मौसम में सावधानियां बरतने की जरूरत है। ऐसे समय में कई तरह की बीमारियां जन्म लेती है। इसमें वायरल फीवर सबसे खतरनाक है। इससे शरीर का उच्च तापमान काफी अधिक हो जाता है। वायरल फीवर संक्रामक हो सकता है जो तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। यह छींक, जम्हाई, खांसी या अति सूक्ष्म तरीके से जीवाणुओं से प्रभावित व्यक्ति के पास रहने से होता है। बच्चों को पानी उबाल कर दें। सफाई का विशेष ख्याल रखें। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ठंडे खानपान से दूर रखें। -डॉ. आरसी झा, बालरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।
हाईलाइटर...
* 210 बेड की कुल क्षमता है जिला अस्पताल की।
* 1874 मरीज शुक्रवार को ओपीडी में पहुंचे।
* 1200 तक सामान्य दिनों में होता है पंजीयन।
* 50 अतिरिक्त बेड बढ़ाए गए हैं अस्पताल में।