देवरिया। सलेमपुर, रामपुर कारखाना, भलुअनी विकास खंडों के पांच प्राथमिक विद्यालयों में नाम के आगे से सोमवार को ‘इस्लामिया’ शब्द हटा दिया गया। अब इन स्कूलों के अभिलेखों में भी नाम परिवर्तन की कवायद शुरू कर दी गई है। बीएसए ने सलेमपुर के नवलपुर प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण भी किया। हालांकि देेसही देवरिया ब्लॉक के हरैया प्राथमिक विद्यालय पर लिखा यह शब्द जस का तस है। प्रधानाचार्य ने इसे मिटवाने की कोशिश तो ग्रामीणों ने विरोध करते हुए रोक दिया। पुराने निर्देश का हवाला देते हुए इस्लामिया शब्द नहीं हटाने की बात कही। प्रधानाचार्य की दलील है कि अभी तक सिर्फ रविवार को विद्यालय बंद करने और शुक्रवार को खोलने का ही निर्देश मिला था। अगर कोई लिखित आदेश मिलेगा तो ‘इस्लामिया’ शब्द हटवाने का प्रयास किया जाएगा।
शुक्रवार को सलेमपुर बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र के निरीक्षण में नवलपुर प्राथमिक विद्यालय बंद मिला था। स्कूल की दीवारों पर परिषदीय प्राथमिक विद्यालय की जगह इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय अंकित है। इसे गंभीरता से लेते हुए बीईओ ने प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी किया। इसके बाद जांच हुई तो रामपुर कारखाना में तीन और देसही देवरिया व भलुअनी ब्लॉक में भी ऐसे एक-एक विद्यालय संचालित होते मिले। नियमों की अनदेखी कर इनमें शुक्रवार को छुट्टी और रविवार को स्कूल खोलने को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने कड़े निर्देश दिए थे।
मामला सुर्खियों में आने के बाद न सिर्फ रविवार को स्कूल बंद रखे गए, बल्कि सोमवार को इनका नाम भी बदल दिया गया। नवलपुर, जैतपुरा, करमहां, शामी पट्टी व पोखरभिंडा ईश्वरी प्रसाद के स्कूलों से इस्लामिया शब्द हटा दिया गया। देसही देवरिया के हरैया गांव में ग्रामीणों के विरोध के चलते स्थिति पूर्ववत है। प्रधानाचार्य मु. जहांगीर सिद्दीकी का कहना था कि उन्होंने पेंटर को बुलाया, मगर ग्रामीण नाम बदलने पर राजी नहीं हुए और विरोध करने लगे। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। वैसे भी उन्हें सिर्फ रविवार को स्कूल खोलने व शुक्रवार को बंद करने का ही आदेश मिला था।
उधर, प्रधान प्रतिनिधि जावेद खां ने पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि यह विद्यालय पहले से ही ऐसे चल रहा है। पूर्व में रहे अधिकारियों ने भी ऐसे ही संचालित करने का लिखित आदेश दिया था। ऐसे में अब नाम बदलना सही नहीं है। बीईओ दयानंद चंद ने बीएसए के निर्देशानुसार कार्रवाई की बात कही है। वहीं, रामपुर कारखाना के बीईओ विनोद त्रिपाठी ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय नियमावली में कहीं भी इस्लामिया शब्द लिखने का उल्लेख नहीं है। डीएम के निर्देश पर नाम दुरुस्त कराए गए हैं।
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अभिलेखों में हर जगह ‘इस्लामिया’ ही दर्ज
सलेमपुर। बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने सोमवार को नवलपुर प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। वहां के अभिलेख भी साथ ले आए। विद्यालय से प्राप्त 1994-95 तक के अभिलेखों में हर जगह इस्लामिया ही दर्ज है। अब तक यह सब किसकी गलती से चलता रहा, बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक यह निर्धारित नहीं कर पा रहा है। बताते हैं कि वर्ष 1972 के पूर्व प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय स्थानीय निकायों के प्रबंधन से संबंधित अधिनियमों से जिला परिषद, नगर निगमों, नगर पालिकाओं से संचालित किए जाते थे। बाद में शासन ने उप्र बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के तहत इन्हें बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित किया गया। नए परिवर्तन के बाद भी अब प्रकाश में आए इस्लामिया स्कूलों के नाम में परिवर्तन नहीं किया गया। विभागीय लापरवाही का आलम यह रहा कि किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं गया।
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जांच आख्या डीएम को सौंपी गई
बीएसए कार्यालय में सोमवार को जिले के छह इस्लामिया प्राथमिक विद्यालयों की जांच रिपोर्ट तैयार किया जाता रहा। रविवार को डीएम ने एडीएम वित्त एवं बीएसए की संयुुक्त टीम गठित कर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। संबंधित विकास खंडों के बीईओ से मिली रिपोर्ट के आधार पर जांच आख्या शाम को तैयार की गई, जिसे डीएम को सौंपा गया।
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बयान
इस्लामिया नाम से संचालित हो रहे प्राथमिक विद्यालयों से यह शब्द हटवा दिया गया है। नवलपुर में वर्ष 1904 से संचालित स्कूल में इस्लामिया शब्द को परंपरा की तरह अब तक निभाया जाता रहा। सारे रिकॉर्ड यही बता रहे हैं। अब ऐसा नहीं होगा। ये सारे विद्यालय विभागीय नियमों से ही संचालित होंगे। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए देवरिया
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स्कूलों पर नहीं होगा जाति-मजहब का कब्जा : सीएम
प्राथमिक विद्यालयों को इस्लामिया स्कूल का नाम देने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई है। सोमवार को एटा में निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्राथमिक विद्यालयों पर किसी जाति-मजहब का कब्जा नहीं होने देंगे। इस मामले में जिस स्तर पर भी लापरवाही बरती गई, उस पर कार्रवाई होगी। सीएम के इस बयान के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मची है। माना जा रहा है कि वर्षों से संचालित इन विद्यालयों के मामले में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो सकती है।