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जिला अस्पताल का बेड फुल्,फर्श पर मरीज

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देवरिया। मरीजों की बढ़ती संख्या से जिला अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। ओपीडी में आने वाले रोगियों को जहां बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं बेड खाली नहीं होने के कारण मरीजों को फर्श पर लेट रहे हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य महकमा परेशान है।
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शासन के निर्देशानुसार एक डॉक्टर को ओपीडी में सिर्फ 50 मरीज देखने का सीमा तय किया गया है। ताकि डॉक्टर मरीजों की पूरी बात सुन सके और बेहतर इलाज मिले। लेकिन मरीजों की संख्या में इजाफा होने से डॉक्टरों की मुसीबत बढ़ गई है। बुधवार को 2300 से अधिक मरीजों ने इलाज के लिए पर्ची कटाया था। ओपीडी में बैठे डॉक्टरों से दिखाने के लिए लोग परेशान नजर आए। बभनी गांव निवासी हरिलाल का बेटा राहुल का पैर फ्रैक्चर था। उसे लेकर सुबह नौ बजे से आए थे। लेकिन 12 बजे तक उनका नंबर नहीं आया था। वह कतार में लगे थे। पकड़ी बाजार के देवपार गांव की पुतनी देवी, संगीता, रामकृपाल आदि लोग तीन घंटे से कतार में लगे थे। इसके अलावा जिला अस्पताल में 230 बेड है, जो एक सप्ताह से भरा हुआ है। बच्चों के वार्ड में एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती किया गया है। बेड नहीं मिलने के चलते मरीजों को मजबूरी में फर्श पर लेटना पड़ रहा है।

इमरजेंसी में बेड का नहीं हुआ विस्तार
देवरिया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड जब से शुरू हुआ तभी से आठ बेड हैं। जबकि इमरजेंसी केस ज्यादा यहां आते है। इमरजेंसी में बेड के विस्तार के लिए लोगों ने कई बार मांग उठाया। लेकिन बेड नहीं बढ़ा। इसके ेचलते मरीजों को बेड के अभाव में फर्श पर लेटना पड़ता है।
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अस्पताल में नहीं है टीटी का इंजेक्शन
जिला अस्पताल में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को टीटी का इंजेक्शन बाहर से खरीदना पड़ता है। दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के लिए यह इंजेक्शन अनिवार्य है। फ्रीजर के अभाव में इंजेक्शन की उपलब्धता नहीं होने की बात स्वास्थ्यकर्मी बता रहे हैं, जबकि सीएचसी व पीएचसी केंद्रों पर इंजेक्शन उपलब्ध है।
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