संकेतक के बिना खतरनाक हुआ अधूरा फोरलेन
नहीं लगाए संकेतक, आएदिन हो रहे हादसे
रविवार को दो जगहों पर चार पहिया वाहन हुए दुर्घटनाग्रस्त
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फोरलेन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधूरे फोरलेन पर न तो कहीं संकेतक लगाए गए हैं और न ही रेडियम पट्टी। कहां कट है, इसका अंदाजा न मिलने से वाहन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। पीडब्लूडी की लापरवाही का नतीजा रविवार को शहर में कई स्थानों पर देखने को मिला।
जिला कारागार गेट के सामने संकेतक नहीं होने के चलते सलेमपुर की ओर जा रही बोलेरो डिवाइडर पर चढ़ गई। इसमें सवार करीब आधा दर्जन लोगों को हल्की चोर्टें आइं। वाहन को सुबह नौ बजे डिवाइडर से उतारा गया। दूसरी घटना 11:30 बजे सुभाष चौक पर हुई। गोरखपुर की ओर जा रहे ट्रक को ओवरटेक कर रही कार अचानक ऊबड़-खाबड़ सड़क आने से अनियंत्रित होकर ट्रक से भिड़ गई। इसमें कार का बोनट क्षतिग्रस्त हो गया। इस तरह की घटना इन दिनों आम हो गई हैं। बावजूद इसके करोड़ों का बजट खपाने वाले अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं है। कहां कट है, कहां निर्माण अधूरा है इसका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं मिल पा रहा है। फर्राटा भरतीं गाड़ियां अचानक क्षतिग्रस्त सड़क आने से अनियंत्रित हो रही हैं। सड़क और डिवाइडर का कलर एक जैसा होने से रात में वाहन चालकों को गाड़ी ड्राइव करने में दिक्कत आ रही है। निर्माणाधीन डिवाइडर पर स्टीकर तक नहीं लगाया जा सका है।
वर्जन
अधूरे निर्माण स्थलों पर विभाग की ओर से अस्थायी संकेतक (बोर्ड) लगाए गए हैं। जेल के सामने संकेतक खुद मैंने खड़ा होकर लगवाया था। वर्करों के हटते ही लोग बोर्ड उखाड़ ले जाते हैं। जल्द ही वहां संकेतक लगाया जाएगा।
-केसरी प्रकाश, सहायक अभियंता पीडब्लूडी, प्रांतीय खंड।
इनसेट
कदम-कदम पर है खतरा
गोरखपुर से सलेमपुर तक बन रहे फोरलेन में कदम-कदम पर खतरा है। इसका अंदाजा शहर के ओवरब्रिज से जिला कारागार तक के सफर में मिल जाता है। कोऑपरेटिव बैंक के सामने एक सिरा अधूरा है। विकास भवन से पीडब्लूडी दफ्तर तक फोरलेन है। इसके तुरंत बाद ही निर्माण अधूरा है।