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दवा से दुआ तक ः मनोरोगों से मुिक्त का नया मंत्र

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जिला चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग में कांउसिलिंग का फायदा तमाम मनोरोगी उठा रहे हैं। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। भागदौड़ की जिंदगी में छोटी-छोटी बातें लोगों को मानसिक रूप से बीमार बना रही हैं। अवसाद के शिकार लोग झाड़फूंक या कोई गलत कदम उठा रहे हैं। ऐसे लोगों को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने नई पहल की है। काउंसिलिंग के जरिए मनोरोगियों को स्वस्थ बनाया जा रहा है। दुआ से दवा तक कार्यक्रम के जरिए अब धार्मिक स्थलों पर जाकर भी अंधविश्वास में जकड़े लोगों को स्वस्थ बनने के लिए काउंसिलिंग को प्रेरित किया जाएगा।
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भागदौड़ वाले जीवन में लोग काफी तनावग्रस्त होते जा रहे हैं। घरेलू विवाद हो या कार्यस्थल का तनाव। धैर्य खोकर लोग गलत कदम उठा लेते हैं। इन समस्याओं के निवारण के लिए झाड़फूंक का सहारा लेने वालों की बड़ी तादाद है। जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग में ऐसे मामले आए दिन पहुंच रहे हैं। अस्पताल तक पहुंचने वाले अधिकांश मनोरोगियों को सिर्फ काउंसिलिंग से राहत मिल रही है। इसी आधार पर अब मानसिक स्वास्थ्य विभाग दुआ से दवा तक कार्यक्रम का आयोजन धार्मिक स्थलों पर करेगा। कैंप लगाकर काउंसिलिंग के माध्यम से उन्हें स्वस्थ बनाएगा। आधा दर्जन से अधिक धार्मिक स्थलों को विभाग ने चिह्नित भी किया गया है। काउंसलर अपनी काउंसलिंग के माध्यम से गलत रास्ते पर चल पड़े युवक, युवतियों और बिखरे परिवारों को सही रास्ते पर लाने का काम करेंगे।

प्रत्येक दिन तीन से चार मनोरोगी पहुंच रहे हैं, जिनकी काउंसिलिंग की जा रही है। पहले वह भी झाड़फूंक की चपेट में थे। काउंसिलिंग का असर दिख रहा है। इसकी सफलता के बाद अब धार्मिक स्थलों पर भी कांउसिलिंग के माध्यम से लोगों को ठीक किया जाएगा।
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- डॉ. शंभू प्रसाद मनोचिकित्सक


संचालक को मिलेंगे पांच हजार रुपये
झाड़फूंक के चक्कर में पड़े लोगों के बचाव के लिए धार्मिक स्थलों पर अभियान चलाकर काउंसिलिंग किया जाएगा। दुआ से दवा तक कार्यक्रम के अंतर्गत धार्मिक स्थल के संचालकों को भी पांच हजार रुपये सरकार की ओर से प्रोत्साहन के रुप में दिया जाएगा।


मानसिक स्वास्थ्य विभाग में इनकी है तैैनाती
मनोचिकित्सक डॉ. शंभू प्रसाद, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नित्रिका पांडेय, साइकेट्रिक सोशल वर्कर वर्षा सिंह, साइकेट्रिक स्टॉफ नर्स अंजली श्रीवास्तव, कम्यूनिटी नर्स ऋषि वर्मा शामिल हैं।


यहां चल रहा केंद्र
पहले चरण में गौरीबाजार, सलेमपुर, भटनी, लार, रुद्रपुर, पथरदेवा, तरकुलवा और बरहज सीएचसी पर केंद्र का संचालन हो रहा है। सीएचसी के अधीक्षकों के अलावा आशा और स्टॉफ नर्सों को इसके लिए निर्देश दिया गया है।


केस एक
शहर के संदीप कुमार (बदला हुआ नाम) अपनी जिंदगी से ऊब चुके थे। आर्थिक तंगी से परेशान होकर जीवन लीला खत्म करने की ठान ली। घरवाले उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विभाग में ले गए। तीन माह की काउंसिलिंग के बाद अब वह ठीक हैं। जूते-चप्पल की दुकान चला रहा है, परिवार में खुशहाली लौट आई हैं।

केस दो
एक मोहल्ले निवासी श्यामू (बदला हुआ नाम) को घरवालों ने लखनऊ पढ़ने भेजा। एक युवती से उसकी नजदीकी बढ़ गई। मोबाइल पर लगातार बात होने से उसका मन पढ़ाई में नहीं लगा। घरवाले उसे लेकर मानसिक स्वास्थ्य विभाग आए। करीब डेढ़ माह तक काउंसिलिंग के बाद श्यामू में बदलाव हुआ। अब वह लखनऊ में पढ़ाई कर रहा है।

केस तीन
बरहज थानाक्षेत्र की एक युवती देवरिया में रहकर बीए की पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन घरवाले तैयार नहीं थे। किसी के माध्यम से लड़की मानसिक स्वास्थ्य विभाग में पहुंची। काउंसलरों ने उसके घरवालों से बात की। करीब एक महीने तक लड़की के घरवालों की काउंसिलिंग की गई। अब युवती अपने भाई के साथ देवरिया में रहकर बीए की पढ़ाई कर रही है।
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