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महंत ने बढ़ाया संत का मान, दी अमिट पहचान

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राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित मेडिकल कॉलेज के उदघाटन अवसर पर मुख्यमंत्री आदित्य नाथ ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। देवभूमि देवरिया की पहचान देवरहा बाबा से जुड़ी हुई है। दशकों से राजनीतिक दलों के लोग उनके नाम पर राजनीति करते रहे हैं, मगर किसी ने भी उनका गौरव, उनकी पहचान को अमिट बनाने की पहल नहीं की। अब गोरक्षपीठ के महंत व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बीड़ा उठाया है। मेडिकल कॉलेज को देवरहा बाबा का नाम देकर सीएम ने न सिर्फ जनता का दिल जीत लिया, बल्कि नामकरण की आड़ में सियासत करने वालों की जुबां भी बंद कर दी है।
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देवरहा बाबा से जिले के जन-जन की आस्था जुड़ी हुई है। वह संत थे, सिद्धपुरुष थे और लोगों के आराध्य भी। देश-दुनिया में उनको मानने वाले हैं, बावजूद जिले में उनके नाम पर कोई बड़ी परियोजना नहीं है। पहचान के नाम पर बस मईल में सरयू तट के किनारे उनका आश्रम ही है, जो पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है। जिले में बनने वाले नए मेडिकल कॉलेज को देवरहा बाबा का नाम दिलाने के लिए ‘अमर उजाला’ ने पहल की थी। 24 और 25 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया। विभिन्न वर्ग के लोगों ने इस पर सहमति भी दी। नतीजा यह हुआ कि लोगों के बीच देवरहा बाबा के नाम पर कॉलेज के नामकरण को लेकर एकजुटता हुई। इससे पहले कॉलेज का नाम विभिन्न राजनीतिक व्यक्तियों के नाम पर करने की मांग उठ रही थी। कोई पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद का नाम देने को कह रहा था तो कहीं मोहन सिंह के नाम पर चर्चा थी। पूर्वमंत्री पं. दुर्गा प्रसाद मिश्र, दीप नारायण मणि, शहीद रामचंद्र विद्यार्थी, चौधरी चरण सिंह सहित कई अन्य नामों पर भी नामकरण को लेकर पिछले कई दिनों से सियासत गरमाई हुई थी। लिहाजा हर किसी की निगाह शिलान्यास समारोह के साथ कॉलेज के नामकरण पर टिकी हुई थी। समारोह के अंतिम क्षणों में जब मुख्यमंत्री ने देवरहा बाबा के नाम पर देवभूमि की पहचान बताते हुए मेडिकल कॉलेज को उनका नाम देने की बात कही तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। कई चेहरे भावुक हो गए, आंखें डबडबा गई। पंडाल से बाहर आते लोग यह कहते सुने गए कि आखिर ‘एक संत ने ही संत को’ पहचान दिलाई दी है, वरना नेताओं को तो बस अपने नाम से मतलब है।

देवरिया-कुशीनगर को बनाएंगे एथेनाल-बॉयो फ्यूल का कटोरा
देवरिया। कभी चीनी का कटोरा कहे जाने वाले देवरिया में गन्ने की खेती किसानों की समृद्धि का आधार रहा है। एक दौर था, जब यहां दर्जन भर चीनी मिलें पूरी क्षमता से चलती थी। शासन-सत्ता की बेरुखी के चलते एक-एक कर चीनी मिलें बंद होती गईं। किसान भी तंगहाल, बदहाल हो गए। किसानों की खुशहाली के लिए इन चीनी मिलों को चालू करने के लिए लंबे समय से मांग उठती रही है। गौरीबाजार, बैतालपुर और भटनी की चीनी मिलों को चलाने के लिए आंदोलन भी जारी है। चुनावी एलान से ठीक पहले सीएम की जनसभा से लोगों को उम्मीद थी कि चीनी मिल पर कोई बड़ी घोषणा होगी। मंच से जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया। जनता की नब्ज पकड़ते हुए मुख्यमंत्री ने बंद मिलों को चालू करने का विश्वास दिलाया। उन्होंने कोई स्पष्ट घोषणा तो नहीं की, लेकिन भविष्य के लिए अच्छे संकेत जरूर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों से देवरिया आता रहा हूं। यहां के हर सुख-दुख में सहभागी रहा हूं। सड़कों पर कई आंदोलनों में भी शामिल हुआ। यहां की हर जरूरत से वाकिफ हूं। कहा कि सिर्फ चीनी के भरोसे मिलों को चलाना आसान नहीं है। लिहाजा उन्हें नए स्वरूप में संचालित करने का प्रयास चल रहा है। गन्ने से एथेनॉल और बॉयो फ्यूल तैयार किया जाएगा। इससे पेट्रोलियम पदार्थों के लिए विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी। देश में ही स्वदेशी ईंधन तैयार होगा। गोरखपुर के पिपराइच और बस्ती के मुंडेरवा में यह प्रयोग चल रहा है। अगर यह सफल रहा तो देवरिया की भी बंद मिलों को उससे जोड़ेंगे। देवरिया-कुशीनगर को सिर्फ चीनी का कटोरा नहीं, एथेनॉल और बॉयो फ्यूल का भी कटोरा बनाया जाएगा।
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गोहत्या नहीं होने देंगे तो खेत भी चरने नहीं देंगे
कार्यक्रम में करीब एक घंटे विलंब से पहुंचे मुख्यमंत्री भीड़ देख गदगद रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें 12 बजे से ही यहां भीड़ पहुंचने का पता नहीं था। अगर जानकारी होती तो वह एक बजे तक ही यहां आ जाते। देरी के लिए गोरखपुर में गो संवर्धन केंद्रों के लिए आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रहे निराश्रित व छुट्टा पशुओं के लिए नई कार्ययोजना बनाई जा रही है। हम गोहत्या नहीं होने देंगे तो किसानों के खेत भी नहीं चरने देंगे। नई योजना के तहत प्रदेश के 17 नगर निगम व सात नगर पालिका क्षेत्रों में गो संरक्षण केंद्र खोले जाएंगे। पिंजरा पोल गोशाला को भी इसी रुप में तब्दील करते हुए संचालित करने की बात कही।

समारोह में रहे मौजूद
सदर सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद, सलेमपुर सांसद रवींद्र कुशवाहा, बांसगांव कमलेश पासवान, क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष डॉ. अंतर्यामी सिंह, जिला प्रभारी श्रीराम चौहान, सदर विधायक जन्मेजय सिंह, सुरेश तिवारी, काली प्रसाद, कमलेश शुक्ला, रजनीकांत मणि, गंगा सिंह कुशवाहा, एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अलका सिंह, रविकांत तिवारी, पुनीत शाही, जयनाथ कुशवाहा, भूपेंद्र सिंह, अंकुर राय, अजय सिंह, डॉ. अजय मणि त्रिपाठी, डॉ. सत्यप्रकाश मणि, शशि मिश्र, सत्येंद्र मणि, अंबिकेश पांडेय, दुर्गेश पांडेय, अजय उपाध्याय, सुब्रत शाही, रूपनारायण मणि, लार चेयरमैन सरोज देवी, शैलेंद्र सिंह, ओमप्रकाश मौर्य आदि मौजूद रहे।
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