देवरिया। नगर पालिका परिषद के बोर्ड की सोमवार को हुई। इसमें आउट सोर्सिंग से तैनात कर्मचारियों के मानदेय को लेकर खूब हंगामा हुआ। सभासदों ने कर्मचारियों को कटौती कर मानदेय देने का आरोप लगाया। पीएफ कटौती के नाम पर भी भ्रष्टाचार की शिकायत की। अध्यक्ष के कार्रवाई के आश्वासन पर सदस्य शांत हुए। बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8.15 लाख रुपये लाभ का बजट पारित किया गया।
पिछली कार्रवाई की पुष्टि के साथ शुरू हुई बैठक में सिर्फ तीन बिंदुओं पर चर्चा होनी थी। आम सहमति से बजट पास होने के बाद सभासद दिनेश शुक्ल, धर्मेंद्र सिंह, गोविंद चौरसिया आदि ने नगर पालिका में आउटसोर्सिंग से तैनात 310 कर्मचारियों के मानदेय का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि शासन ने कुशल, अकुशल व अर्द्धकुशल श्रेणी के कर्मचारियों की तीन श्रेणियां तय करते हुए उनका न्यूनतम दैनिक मानदेय निर्धारित किया है। इनको इस दर से भी कम मानदेय दिया जा रहा था। सेवा प्रदाता संस्था कर्मचारियों के मानदेय में भारी कटौती कर रही है। किसी भी कर्मचारी का पीएफ एकाउंट नहीं खोला गया है, जबकि पीएफ के नाम पर मानदेय से 20 से 25 फीसदी कटौती हो रही है। कर्मचारियों को पीएफ रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दिया जा रहा। इससे कर्मचारियों में असंतोष है। सेवा प्रदाता संस्था भ्रष्टाचार में डूबी है, लिहाजा उस पर कार्रवाई की जाए। हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष अलका सिंह ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि पूरे प्रकरण की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अगर स्वीकृत दर से मानदेय देने में गड़बड़ी मिली तो सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध समाप्त कर नया टेंडर कराया जाएगा। बैठक में श्यामसुंदर कन्नौजिया, अमित मिश्र, चंद्रशेखर गुप्ता, आशीष गुप्ता, रजनी जायसवाल, प्रभाकर शाही, गुलाब यादव, अजय कुमार सिंह, गीता देवी, चंद्रशेखर, सुमित गुप्ता, बेबी शाही, विनय सिंह, अजय गुप्ता, आशा देवी, आरती देवी, ऋषि कुमार यादव, सेराज अहमद, अनूप पांडेय, इशरावती देवी सहित कर्मचारी आलोक श्रीवास्तव, विनय सिंह, दीपक पति तिवारी, पुरुषोत्तम सिंह, हृदयशंकर श्रीवास्तव, उदयभान, काशीनाथ आदि मौजूद रहे।
8.15 लाख लाभ का बजट पारित
बैठक में ईओ अमित कुमार सिंह ने बोर्ड के समक्ष वित्तीय सत्र 2018-19 में विभिन्न स्रोतों से 99 करोड़ 21 लाख 55 हजार रुपये की अनुमानित आय का ब्योरा पेश किया। जबकि विभिन्न मदों में 99 करोड़ 13 लाख 40 हजार का व्यय होना दर्शाया। बजट में करीब 8 लाख 15 हजार रुपये का लाभ बताया गया। सभी सदस्यों ने एक स्वर में बजट को मंजूरी दी।