देवरिया। शासन के लुभावने ऑफर के बाद भी सिनेमाघरों के कारोबारियों का बिजनेस नहीं बढ़ पा रहे हैं। विभागीय अफसरों की लाख कोशिशों के बावजूद लोग पूंजी निवेश करने से कतरा रहे हैं। जिले में इन दिनों 11 सिनेमाघर बंद हैं। इसे लेकर मालिकों और अफसरों के साथ कई बार बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन बैठक बेनतीजा रहा।
आज के कुछ साल पहले सिनेमाघरों में फिल्म देखने के लिए टिकट को लेकर मारामारी रहती थी। लेकिन इंटरनेट का विस्तार होने के बाद सिनेमाघरों के दिन लद गए और 11 सिनेमाघर बंद हो गए। इन दिनों सात सिनेमाघर संचालित हो रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद शासन ने सिनेमाघरों को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में छूट का ऑफर दिया है। इसमें मल्टीप्लेक्स, बंद पड़े सिनेमाघरों को चालू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मनोरंजन कर विभाग के अफसरों ने इसके लिए जिले के सिनेमाघरों के मालिकों के साथ वार्ता भी की गई। लेकिन मालिकों पर ऑफर का असर नहीं दिखा। मनोरंजन कर अधिकारी प्रभात चौधरी ने बताया कि सिनेमाघरों की दशा सुधारने के लिए शासन की ओर से टैक्स में छूट है। सिनेमाहाल के मालिकों को इसकी जानकारी दी गई है। लेकिन इसको लेकर उत्सुकता नहीं दिख रही है।
टैक्स में मिलेगा छूट
बंद पड़े या संचालित सिनेमाघरों को पूर्ण रूप से तोड़कर आधुनिक तरीके से निर्माण कराने, बंद पड़े एवं संचालित सिनेमाघरों को भवन की आंतरिक संरचना में परिवर्तन कराने, प्रदेश में बंद पड़े सिनेमाघरों को बिना किसी आंतरिक संरचना में परिवर्तन किए संचालित करने, 226 सीट के एकल स्क्रीन सिनेमाघरों के निर्माण कराने, मल्टीप्लेक्स निर्मित सिनेमाघरों, सिनेमाघरों के उच्चीकरण कराने के लिए तीन साल से छह साल तक टैक्स में छूट दिया गया है।
सिनेमाघरों के पुराने दिन लौटना मुश्किल
सिनेेमाघर के मालिक व वरिष्ठ रंगकर्मी वाई शंकर मूर्ति ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद वैसे ही टैक्स कम हो गया है। बावजूद इसके सिनेमाघरों को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से जो ऑफर दिया दिया गया है। उसका कोई खास औचित्य नहीं है। शासन का फोकस मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में है जो बड़े शहरों के लिए है। खुद ही मेरा एक सिनेमाघर बंद हो गया और दूसरा लीज पर दे रखा हूं।