देवरिया। राशन कार्डों का जिस उद्देश्य से दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है, वह गंवई राजनीति की भेट चढ़ गया है। गांव में बिना गए सेक्रेट्री और लेखपाल सत्यापन कर रहे हैं। इसकी वजह से इसका लाभ अपात्रों को मिल रहा है। इसकी शिकायत रोज जिला पूर्ति कार्यालय में पहुंच रही है।
खाद्य सुरक्षा योजना लागू होने के बाद बीपीएल और एपीएल कार्ड निरस्त कर पात्र गृहस्थी के तहत राशन कार्ड लोगों को बनाया गया। इसके लिए लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया और सत्यापन के बाद सूची प्रकाशित कर दी गई। इसमें अपात्र वंचित हो गए थे और पात्रों को सीधा लाभ मिल रहा था। योगी सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए दुबारा सेक्रेट्री और लेखपालों के माध्यम से राशन कार्डों का सत्यापन कराने का निर्देश दिया। लेकिन सरकार का दुबारा सत्यापन कराने का जो उद्देश्य है। उस पर अफसर पानी फेर रहे है। प्रधानी की चुनाव को लेकर अधिकांश गांवों में खेेमेबाजी है। गांव में जाने के बजाए सिक्रेटरी और लेखपाल प्रधानों से संपर्क कर कार्डों का सत्यापन कर रहे है। इससे प्रधान सिर्फ अपने खेमे का सत्यापन करा रहे है और विपक्षी खेमा के लोगों का नाम कटवा रहे है। ऐसी शिकायत आए दिन पूर्ति कार्यालय में अफसरों के पास पहुुंच रही है। इसको लेकर पूर्ति विभाग के अफसर काफी परेशान हैं। बुधवार को डीएसओ के सामने कई गांव के लोग राशन कार्डों के ऑनलाइन सूची का प्रिंट आउट लेकर पहुंचे थे और एक-एक कर कमियों को बताया। डीएसओ केजी पांडेय ने बताया कि मेरे पास हैंडस कम है। इस लिए सेक्रेट्री और लेखपालों से कार्डों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन में लापरवाही बरती जा रही है। इसके चलते आय दिन शिकायत कार्यालय तक पहुंच रही है। इससे विभागीय दिक्कते बढ़ गई है।