बरहज (देवरिया)। करीब छह दिनों से घाघरा के जलस्तर में निरंतर हो रहे वृद्धि से तटवर्ती क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। घाघरा जहाज घाट पर बने बाढ़ मापक गेज पर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
मानसून के दस्तक देने और नेपाल की ओर से चार फाटकों से पानी छोड़ने से क्षेत्र के नदियों में काफी उफान आया है। रोजाना 30-40 सेमी हो रही घाघरा में वृद्धि के कारण नदी का जलस्तर डेंजर जोन के करीब पहुंच गया है। पिछली बरसात में नदी के जलस्तर में कोई खास वृद्धि न होने से विभाग भी चुप्पी साध हाथ पर हाथ धरे बैठा था। अचानक नदियों के जलस्तर में आए उफान को देख विभाग के पांव फूलने लगे। मातहत जहां एक ओर सरकार से मिलने वाला धन न मिलने का रोना रो रहे हैं। वहीं आनन-फानन में हो रही कटान को रोकने के लिए प्रयासरत हैं। लोगों का कहना है कि करीब छह माह से कटइलवा और संगम तट पर हो रहे बेतहाशा कटान के बावजूद विभाग ने कोई समुचित प्रबंध नहीं किया था। विकराल होती नदी के तेज बहाव में कटइलवा के समीप कटान रोकने के लिए विभाग ने करीब 28 लाख की लागत से बंबू क्रेट आदि लगाया है। लेकिन तेज बहाव के चलते करीब आधा दर्जन बंबू क्रेट बह जाने की बात गांव वाले बता रहे हैं। जबकि कपरवार के संगम तट पर घाघरा कृषि भूमि के काट रही है। जिससे कुवाइच टोला और कुरह परसियां के विस्थापित चार घरों के लोग कटान के मुहाने पर हैं। जलस्तर में करीब सवा दो मीटर की वृद्घि से लोग 1998 का मंजर सोच कर सहम जा रहे हैं।
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आरती घाट को ढहाने को मचल रही घाघरा
बरहज। नगर स्थित जहाज घाट पर बने तुलसी घाट पर नगरपालिका ने करीब 65 लाख की लागत से आरती के लिए घाट और पांच चौक का निर्माण कराया था। करीब छह दिनों से नदी के बढ़ते जलस्तर और दबाव के कारण लाखों की लागत से बने घाट का अस्तित्व संकट में है। सीढ़ियों और चौक के आए दरार के कारण विभाग ने लोगों को उधर जाने से रोकने के लिए रस्सी आदि बांध रखा है। जहां एक ओर कराए गए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो रहा है। वहीं नदी उसे अपने आगोश में लेने के लिए मचल रही है।