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15 तक स्कूलों में छात्रों को मिल जाएगी ड्रेस

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स्कूल ड्रेस - फोटो : amar ujala
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देवरिया। जिले के परिषदीय स्कूलों के बच्चों को इस बार 15 जुलाई तक ड्रेस वितरित कर दिया जाएगा। इसके लिए शासन ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रत्येक ड्रेस के लिए 300 रुपये तय किए गए हैं। दो सेट का ड्रेस 600 रुपये में खरीदा जाएगा। पहले यह राशि 400 रुपये थे। नई व्यवस्था से माना जा रहा है कि बच्चों को बेहतर गुणवत्ता का ड्रेस मिलेगा। जिले के करीब 2.30 लाख छात्र इससे लाभान्वित होंगे। जल्द ही विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में छात्र संख्या के हिसाब से धन भी भेज दिया जाएगा।
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परिषदीय स्कूल के छात्रों को सरकार प्रत्येक साल दो सेटों में निशुल्क यूनिफार्म उपलब्ध कराती है। सत्र 2019-20 में परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निशुल्क यूनिफार्म 15 जुलाई तक उपलब्ध करा दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक के आदेश पर बीएसए ने सभी बीईओ को पत्र जारी कर सबकी जिम्मेदारी तय करते हुए एक से 15 जुलाई तक ड्रेस वितरित करने का निर्देश जारी किया है। अब तक मिलने वाले धन से जो ड्रेस मिलता था, उसकी क्वालिटी को लेकर अभिभावक लगातार शिकायत करते थे। अब प्रत्येक सेट की खरीदारी के लिए 300 और दोनो सेट के लिए 600 रुपये निर्धारित किया गया है।

चार जिलों के छह ब्लॉकों में बंटेंगे खादी के ड्रेस
प्रदेेश में खादी ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रदेश के चार जिलों के छह ब्लॉकों में खादी के कपड़े से बने यूनिफार्म मुहैया कराने का निर्णय किया है। इसमें लखनऊ के मोहनलालगंज ब्लाक, सीतापुर के सिघौली, मिर्जापुर के छानबे, बहराइच के मटेरा, महसी व विश्वेश्वरगंज ब्लॉक को चुना गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यहां के बच्चों को 67 प्रतिशत कॉटन व 33 प्रतिशत पॉलिस्टर निर्मित खादी कपड़ा से बने यूनिफार्म दिया जाएगा। इसमें सफलता मिली तो इसे सभी जिलों में भी लागू किया जाएगा।
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ड्रेस वितरण में गड़बड़ी पर बीईओ जिम्मेदार
बीएसए ओमप्रकाश यादव ने बताया कि यूनिफार्म समय से वितरित हो जाए, इसके लिए सभी बीईओ को जिम्मेदारी दी गई है। विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से गुणवत्ता युक्त ड्रेस की खरीदारी कर स्कूलों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से वितरण कराने का आदेश दिया गया है। यूनिफार्म की जांच को गठित टास्क फोर्स में समस्त जिला समन्वयक, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, डीआईओएस आदि को शामिल किया जाएगा। वितरण में गड़बड़ी पर बीईओ जिम्मेदार होंगे।
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