फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां भी हो सकता है तक्षशिला कॉम्पलेक्स जैसा हादसा

विज्ञापन
नक्शे में 60 फुट मौके पर 20 फुट में सिमटी हनुमान मंदिर के तरफ जाने वाली सडक। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
देवरिया। जिम्मेदार जाग जाएं तो ठीक वर्ना सूरत के तक्षशिला कॉम्पलेक्स जैसा हादसा देवरिया में भी हो सकता है। यहां कई ऐसी इमारतें हैं जो आग से सुरक्षित नहीं हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी समय पर नहीं पहुंच पाएगी। स्थानीय स्तर पर किए गए इंतजाम दिखावा बनकर रह गए हैं। तीन मंजिला इमारतों में खुले अधिकांश शॉपिंग मॉल में आपातकालीन दरवाजे भी नहीं हैं। मेन दरवाजा बाधित हुआ तो यहां भी लोगों को छत से कूदकर ही जान बचाना पड़ेगा।
विज्ञापन

शहर को सुव्यवस्थित बसाने का जिम्मा संभाल रहे विनियमित क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारियों ने शहर के कई हिस्सों को डेंजर जोन की शक्ल दे दी है। नक्शे में चौड़ी दिखने वाली सड़कें धरातल पर संकरी हो चुकी हैं। कोऑपरेटिव चौराहे से हनुमान मंदिर को जाने वाली सड़क को देखें तो यह नक्शे में 60 फुट है, जबकि मौके पर 20 फुट जगह भी वाहनों के आने जाने के लिए नहीं बची है। आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी रास्ते में फंसना तय है। इसके अलावा भी कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर कर्मियों के पहुंचने में दिक्कत आ सकती है।

यह इलाके बने डेंजर जोन
शहर का का छह मुखी चौराहा, अंसारी रोड, मोहन रोड, सब्जी मंडी, नई बाजार, गुड़ मंडी, पेड़ा गली, ठठेरी गली, बताशा गली आदि सड़कें व्यवसायिक दृष्टिकोण से अहम मानी जाती हैं। करीब 90 हजार वर्ग मीटर में फैले इस एरिया में फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचना तो दूर एक ठेला भी बमुश्किल ही पहुंच पाता है। यहां होलसेल समेत करीब एक हजार दुकानें हैं।
विज्ञापन


अग्निशमन विभाग भी है लापरवाह
आग से होने वाले हादसे को लेकर अग्निशमन विभाग भी सतर्क नहीं है। जिन बाजारों व आवासीय कालोनियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकती उन इलाकों के लिए अब तक कोई प्लान नहीं बनाया और ना ही सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी पर कार्रवाई की। ज्यादातर शॉपिंग मॉल, शो रूम में आग बुझाने के उपकरण नहीं हैं। कई जगह लगे फायर एक्सटिंग्यूसर सिलिंडर की वैधता समाप्त हो चुकी है।

पिछले महीने कई जगह लगी थी आग
पिछले माह कुर्ना नाले के पास कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में आग लगी थी। दर्जनों घर और दुकानें जलकर राख हो गईं। इससे पूर्व शहर के बीचोबीच कचहरी के पास आग से फर्नीचर की दुकान जली थी। डेढ़ माह के भीतर शहर में छोटी बड़ी कई अगलगी की घटना सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन चेतने को तैयार नहीं है।

नोटिस देकर भूले
सितंबर माह में ‘अमर उजाला’ में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन एसडीएम रामकेश यादव ने दो दर्जन व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजकर नक्शा प्रस्तुत करने को कहा था। यह सख्ती कागजों तक सिमट कर रह गई। अग्निशमन विभाग ने भी किसी पर कार्रवाई करने से मुंह मोड़ लिया।
विज्ञापन


जल्द ही टीम गठित कर अभियान चलाया जाएगा। बिना नक्शा वाले व नक्शा के विपरीत भवन निर्माण करने वाले भवन स्वामियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-दिनेश मिश्र, एसडीएम सदर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें