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चार बहनों का इकलौता भाई थे संदीप

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मेरठ में अनियंत्रित हो कर नहर में गिरी कार मृतक संदीप गुप्ता की विलाप करती पत्नी आशा। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। लार के पिंडी गांव निवासी सेना से सेवानिवृत्त हुए कपूर चंद्र के परिवार पर एक पल में वज्रपात हो गया। उनके बेटे संदीप और पोते आशुतोष की तो मौत हो गई, बेटी के बेटे अंश और अंशिका भी हादसे में जान गंवा बैठे। बदहवास कपूर चंद्र को कुछ भी नहीं सूझ रहा था।
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कपूरचंद्र की चार बेटियां अंजू, चित्रा, गुड़िया और रिंकी और एकमात्र बेटा संदीप था। संदीप ने एक रिश्तेदार की बेटी आशा गुप्ता से प्रेम विवाह किया था। संदीप पास के ही एक निजी स्कूल में कंप्यूटर शिक्षक था। अंजू पत्नी राजेश निवासी नैनहा बनकटा की दो बेटियां सोनी 18 और शालिनी 21 मामा के घर रहकर पढ़ाई करती हैं। गर्मी की छुट्टी होने पर 23 मई को संदीप, पत्नी आशा, बेटे आशुतोष, बेटी आराध्या और दोनों भांजियों को लेकर सबसे छोटे बहनोई देवी गुप्त के पास गुरुग्राम गए। वहां से संदीप और देवी गुप्त का पूरा परिवार हरिद्वार स्नान करने जा रहे थे। मेरठ के गंग नहर में कार पलट जाने संदीप, आशुतोष, भांजे अंश और भांजी अंशिका की मौत हो गई। कार चालक विक्की यादव भी हादसे का शिकार हुआ। सूचना मिलने पर कपूर चंद्र गुप्त बदहवास हो गए। रिश्तेदारों के साथ वे गोरखपुर पहुंचे और वहां से मेरठ के लिए रवाना हो गए। देवी गुप्त के भटवलिया स्थित आवास पर पिता दरबारी गुप्त और बड़े भाई रमेश चंद्र गुप्त मिले। अंशू और अंशिका की मौत से दोनों लोग सदमे में हैं। पेशकार पद से सेवानिवृत्त अंशिका के बाबा दरबारी लाल ने बताया कि 20-25 दिन पहले देवी यहां आया था। शाम को वह बिना बताए चला गया। गुरुग्राम से आने पर ससुराल में ही ज्यादा रहता था। पोती की मौत की सूचना मिली है। हमारे परिवार पर तो वज्रपात हो गया है।
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