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मोदी की सुनामी में भी नहीं टूटा उग्रसेन की जीत का रिकार्ड

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मोदी की सुनामी में भी नहीं टूटा उग्रसेन की जीत का रिकार्ड
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- वर्ष 1977 में करीब 54 फीसदी वोटों के अंतर से जीते थे उग्रसेन सिंह
- 1984 की सहानुभुति लहर में 33 फीसदी रहा जीत-हार अंतर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। देवरिया सीट से रमापति राम त्रिपाठी ने करीब ढाई लाख वोटों से बड़ी जीत दर्ज की है। इससे पहले वर्ष 2014 में कलराज मिश्र ने भी 2.65 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। मोदी लहर में मिली यह जीत 1977 की जेपी लहर के आगे फीकी है। देवरिया सीट के इतिहास में 1977 में उग्रसेन को मिली बड़ी जीत का रिकार्ड आज भी कायम है।
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वर्ष 1952 से अब तक के 17 चुनाव देख चुके देवरिया लोकसभा सीट पर पिछले दो बार से लगातार जीत का आंकड़ा ढाई लाख तक पहुंच रहा है। इसके पीछे की एकमात्र वजह मोदी लहर है। मोदी नाम की सुनामी में बड़े-बड़े दुर्ग ढह जा रहे हैं। जीत के नए रिकार्ड कायम हुए हैं, मगर देवरिया सीट पर बड़ी जीत का रिकार्ड अब भी बरकरार है। अतीत पर गौर करें तो यहां सबसे बड़ी जीत 1977 में उग्रसेन सिंह को मिली थी। इमरजेंसी के बाद कांग्रेस विरोधी लहर में उग्रसेन ने दिग्गज कांग्रेसी नेता और लगातार सांसद चुने जाते रहे विश्वनाथ राय को 54.3 फीसदी वोटों के अंतर से मात दी थी। इसके बाद किसी भी चुनाव में ऐसी जीत नहीं मिल सकी। वर्ष 1984 में सहानुभूति लहर में भी कांग्रेस के राजमंगल पांडेय 33.72 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सके थे। तीसरी बड़ी जीत वर्ष 2014 में कलराज मिश्र को 27.31 प्रतिशत के अंतर के रुप में हासिल हुई।
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देवरिया सीट की तीन सबसे बड़ी जीत:
वर्ष 1977:
उग्रसेन सिंह: बीएलडी: 77.15
विश्वनाथ: कांग्रेस: 22.85
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वर्ष 1984:
राजमंगल पांडेय: 55.71
रामधारी शास्त्री: 21.99
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वर्ष 2014:
कलराज मिश्र: 51.1
नियाज अहमद: 23.79
(जीत-हार के आंकड़े प्रतिशत में)
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