- बंद पड़ी गौरी बाजार चीनी मिल का मामला
- जायजा लेने पहुंचे थे मिल प्रबंधन के प्रतिनिधि, बंधक बनाकर पिटाई का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गौरी बाजार। पिछले 22 वर्षों से बंद चल रहे गौरी बाजार चीनी मिल के निरीक्षण पर आए प्रबंध तंत्र के प्रतिनिधि से मजदूरों की झड़प हो गई। आरोप है कि बकाया भुगतान की मांग कर रहे मजदूरों ने प्रतिनिधि को घेर लिया और पिटाई भी की। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई। देर शाम तक थाने में पूछताछ होती रही। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। रात साढ़े 8 बजे तक केस दर्ज करने की प्रक्रिया जारी थी।
वर्ष 1996 में अनिश्चितकालीन ब्रेकडाउन के बाद से बंद पड़े गौरी बाजार चीनी मिल को कोलकाता के राजेंद्रा इस्पात ने वर्ष 2014 में खरीदा था। मिल पर किसानों व मजदूरों का करोड़ों रुपये बकाया है। गोरखपुर के उप श्रम आयुक्त ने 14.73 करोड़ रुपये की अदायगी के लिए मिल प्रबंधन को नोटिस भी भेजी थी। बाद में इनकी कीमत की संपत्ति मौके पर न होने की बात कह नोटिस वापस करा दी गई। बताते हैं कि बुधवार की अपराह्न प्रबंध तंत्र के प्रतिनिधि के रुप में बृजेश चौधरी मिल परिसर पहुंचे। इसकी भनक लगते ही मजदूर व किसान एकत्रित हो गए। बकाया भुगतान की मांग करने लगे। मजदूरों का कहना है कि मिल प्रबंधन मौके पर मौजूद सामानों को बेचने के प्रयास में था। इसका विरोध करने पर विवाद शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ती देख किसी ने सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे गौरी बाजार एसओ परमाशंकर यादव ने किसी तरह मामले को शांत कराते हुए बृजेश चौधरी और मजदूर नेता ऋषिदेव यादव सहित अन्य को थाने ले गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। बृजेश चौधरी का आरोप है कि वह सुरक्षाकर्मियों का भुगतान देने आए थे, लेकिन मजदूरों ने उन्हें घेरकर बंधक बना लिया और पिटाई की। उधर, मजदूर नेता ऋषिदेव यादव ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि प्रबंध तंत्र के प्रतिनिधि मिल के सामानों को बेचने की कोशिश कर रहे थे। इसका विरोध करने पर उन्होंने विवाद किया और पुलिस बुला ली। इस बाबत थाना प्रभारी परमाशंकर यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। छानबीन के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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