देवरिया। जिले में स्वच्छता अभियान और प्रधानमंत्री आवास को जिले में झटका लग रहा है। इसकी वजह बालू की किल्लत बताई जा रही है। ऐसे में शासन की ओर तय लक्ष्य को पूरा करना संभव नहीं दिख रहा है। इसको लेकर अफसर जहां पशोपेश में है। वहीं लाभार्थियों को शौचालय निर्माण में पसीना छूट रहा है।
सरकार की दोहरी नीति से सरकारी योजनाएं अधर में लटकी हैं। स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 52 हजार शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है। इसके लिए जरूरतमंदों को 12 हजार रुपये आर्थिक मदद दी जा रही है। पिछले दो माह तक गांवों में शौचालयों का निर्माण तेजी से हुआ और लक्ष्य के सापेक्ष 38 हजार शौचालय बने। लेकिन इधर बालू की किल्लत से शौचालयों का निर्माण लटका हुआ है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में इस वर्ष 1568 आवास निर्माण कराने का लक्ष्य है। अफसरों की माने तो इसमें 700 से अधिक आवास बन चुके हैं। लेकिन बालू की कमी के कारण आवास निर्माण रुका है। मानक के अनुसार लक्ष्य पूरा करने के लिए शासन का विभागीय अफसरों को निर्देश है। इस बाबत पीडी रविशंकर राय ने बताया कि बालू की दिक्कत तो है। इससे निर्माण कार्यों की गति धीमी है। इस कारण परेशानी हो रही है।
121 गांव ओडीएफ में चयनित
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत चल रहे अभियान में 121 गांव ओडीएफ हुए हैं। इन गांवों में शौचालय का निर्माण पूरा हो गया है। बावजूद इसके विभागीय अफसरों की नजर इन गांवों पर है।
जिले में सिर्फ एक जगह खनन का ठेका
खनन अधिकारी उमाशंकर की मानें तो जिले में सिर्फ तरकुुलवा थाने के छोटी गंडक में बालू खनन का ठेका है। इसके अलावा बालू खनन के लिए अभी ठेका नहीं हुआ है। लेकिन लार, बरहज, भटनी और सलेमपुर इलाके में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से रात को बालू खनन कर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है।