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सिक्कों का ढेर बना बव्यापारियों के लिए संकट

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संदीप श्रीवास्तव
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रामपुर कारखाना। कस्बे से लेकर गांवों में सिक्का लेने से कतराने लगे हैं। वजह उनके पास सिक्कों की ढेर है और बैंक लेने से इन्कार कर रहे हैं। ग्राहकों के लिए भी सिक्का संकट बनता जा रहा है।
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कस्बे के अल्ताफ हुसैन कबाड़ का काम करते हैं। इनके पास लगभग 50000 के सिक्के हैं, लेकिन बैंक इन सिक्कों को लेने से कतरा रहा है। ओझउल कमर की कस्बे में जनरल स्टोर की दुकानदार है। इनके पास 75000 के सिक्के हैं, लेकिन कोई लेने को तैयार नहीं है। कोटवा मोड़ निवासी थोक व्यवसायी राजकुमार गुप्ता का कहना है कि उनके पास करीब एक लाख रुपये के सिक्के इकट्ठे हैं। इसे बैंक लेने को तैयार नहीं है। इससे पूंजी फंसती जा रही है। ग्राहकों को संतुष्ट करना जरूरी है। ऐसे में उनसे सिक्का लेना पड़ता है, लेकिन बैंक वाले सिक्के लेने से इनकार कर रहे हैं। यही हाल डुमरी चौराहे पर किराने का कारोबार करने वाले जावेद अंसारी का है। इनके पास भी 50 हजार रुपये के सिक्के इकट्ठा हैं। पटनवा पुल के पास विद्या प्रसाद चाय की दुकानदार है। इनके पास 10000 रुपये से ऊपर के सिक्के हैं। देवरिया-कसया मार्ग पर रामपुर कारखाना चौराहा के पास मोहम्मद जिलानी की बिस्किट टॉफी का व्यवसाय है। इनके पास भी एक लाख से अधिक रुपये के सिक्के एकत्र हो गए हैं। भारतीय स्टेट बैंक के प्रभारी शाखा प्रबंधक रामकृत प्रसाद का कहना है कि जगह और कर्मचारियों की कमी के कारण सिक्के नहीं लिए जा रहे हैं। सिक्का बंदी की बात अफवाह है।
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