देवरिया। डीएम की पत्नी डॉ. अल्का सागर की मौजूदगी के बाद भी महिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है। अल्ट्रासाउंड और ओपीडी में इलाज के लिए आईं महिलाओं को मजबूरी में फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। इससे विभागीय अफसर बेखबर हैं। जिम्मेदारों के सह पर सीजर व प्रसव कराने के लिए दाई और कंपाउंडर लोगों से रकम वसूल रहे हैं।
बारिश के बाद भी गुरुवार को जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की भीड़ रही। दोपहर 12 बजे तक अल्ट्रासाउंड के लिए 98 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ था। कुर्सी के अभाव में अधिकांश महिलाएं फर्श पर बैठीं थीं। ओपीडी में दोपहर को पहुंची डॉ.रीता सिंह और डॉ. आंचल महिलाओं का इलाज कर रही थीं। प्रसव के बाद जिन वार्डों में प्रसूताओं को रखा गया था, वहां सीलिंग फैन होने के बाद भी गर्मी से महिलाएं परेशान थीं। कुछ प्रसूताओं के घर वाले निजी पंखा लाकर बेड के पास लगाए हुए थे तो कुछ हाथ के पंखा का सहारा लेते हुए नजर आए। एक प्रसूता के साथ तीन से चार लोग वार्ड में मौजूद दिखे। इन पर लोगों पर रोकथाम की कोई व्यवस्था नहीं है। सीजर कक्ष के बाहर मौजूद तीमारदारों ने दबी जुबान से बताया कि दो से तीन हजार रुपये दाई और कंपाउंडर वसूल रहे हैं। नहीं देने पर मेडिकल कॉलेज रेफर कराने की धमकी देते हैं। इसमें जिम्मेदार भी शामिल हैं। लेबर रूम में प्रसव के बाद खुशी के नाम पर लोगों से रकम लिया जा रहा है। सीएमएस डॉ. माला कुमारी ने बताया कि डॉक्टरों की कमी से दिक्कत हो रही है। प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज देने की कोशिश की जाती है। वसूली की शिकायत मिलने पर कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाती है।
इनसेट में
रात को आईसीयू में लटक जाता है ताला
रात आठ बजे के बाद बच्चों के लिए बना आईसीयू कक्ष में ताला लटक जाता है। इसकी वजह डॉक्टरों की कमी बताई जा रही है। सुबह 8 से 2 बजे तक शशि कुमार राय और 2 से रात 8 बजे तक डॉ. मंजरी मिश्रा ड्यूटी करती हैं। जबकि वार्ड ब्वॉय, स्टाफनर्सों की तैनाती पूरी है। इसके बाद लोगों को बच्चों को आईसीयू में रखने के लिए निजी अस्पतालों में लेकर जाना पड़ता है। जब से जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा शुरू हुई तब से यह परेशानी चली आ रही है।
इन्सेट में
डीएम की पत्नी ढाई माह से कर रहीं ओपीडी
डीएम सुजीत कुमार की पत्नी डॉ. अल्का सागर एमएस गायनोकॉलोजिस्ट हैं। इनके अंदर रोगियों का सेवा करने का ललक है। करीब ढाई माह से महिला अस्पताल में जाकर ओपीडी कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर सीजर भी करती है। इनके महिला अस्पताल में आने से काफी हद तक व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन जैसा चाहिए वैसा नहीं । इधर दो दिनों से व्यवस्तता के कारण अस्पताल वह नहीं आ पा रही है।