देवरिया। बैकुंठपुर स्थित श्री बैकुंठनाथ पवहारि संस्कृत महाविद्यालय में 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड विषय पर आधारित कार्यशाला 25 अप्रैल से शुरू होगी। नौ मई तक चलने वाली कार्यशाला में देश के विभिन्न जगहों से आए विषय विशेषज्ञ शिरकत करेंगे। महाविद्यालय प्रशासन इसे लेकर तैयारियों में जुटा हुआ है।
कार्यक्रम संयोजक पं. विवेक कुमार उपाध्याय ने रविवार को बताया कि ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान एवं जनकल्याण केंद्र देवरिया एवं श्री बैकुंठनाथ पवहारि संस्कृत कॉलेज के संयुक्त संयोजन में कार्यशाला होगी। 25 अप्रैल को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल इसका शुभारंभ करेंगे। 26 अप्रैल को कर्मकांड का महत्व व सामाजिक उपयोगिता विषय पर नई दिल्ली के डॉ. मारकंडेय नाथ तिवारी, 27 को पंचांग पूजन विधि एवं कुशकंडिका का प्रयोग विषय पर गोरखपुर के डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, 28 को वास्तु-शांति विधान नवग्रहादि स्मार्तयज्ञ विषय पर वाराणसी के डॉ. मनोज मणि त्रिपाठी, 29 को वैधव्य दोष एवं परिहार विषय पर लखनऊ के डॉ. मदन मोहन पाठक, 30 अप्रैल को पंचांग द्वारा मुहूर्त परिज्ञान विषय पर वाराणसी के डॉ. श्रीकांत तिवारी, 1 मई को अष्टकूट मेलापक दोष एवं परिहार विषय पर डॉ. श्रीकांत तिवारी, दो मई को फलादेश ज्ञानविधि विषय पर बीएचयू ज्योतिष विभाग के डॉ. सुभाष पांडेय, तीन मई को भूमि का शुभाशुभत्व परीक्षण व काकिणी विचार विषय पर डॉ. सुभाष पांडेय, चार मई को योग परिकर्म पर बीएचयू वेद विभाग के डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी, पांच मई को ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड का अंतरसंबंध पर बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय, छह मई को ग्रहराशि, नक्षत्र एवं द्वादश भावों के विचारणीय विषय पर वाराणसी के डॉ. नर्वदेश्वर मिश्र, सात मई को व्यावसायिक वास्तु परिज्ञान विषय पर नई दिल्ली के डॉ. अशोक थपलियाल, आठ मई को कक्षविन्यास व विचारणीय तत्वचिंतन पर डॉ. अशोक थपलियाल अपनी बात रखेंगे। उन्होंने बताया कि नौ मई को ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड का परमोद्देश्य विषय पर समापन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय होंगे।