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गिरिजा-कंचन ने किया गंभीर अपराध, न दी जाए जमानत

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देवरिया। बालगृह बालिका कांड की मुख्य आरोपी गिरिजा त्रिपाठी और बेटी कंचनलता की जमानत के लिए पड़ी अर्जी पर सुनवाई सोमवार को फिर टल गई। कोर्ट ने इसके लिए 11 सितंबर की तिथि तय की है। इस बीच सीजेएम कोर्ट पहुंची एसआईटी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दोनों को जमानत न देने के लिए अपना पक्ष रखा। गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए कहा गया कि अगर इन्हें जमानत मिली तो वे बाहर जाने के बाद साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। बता दें कि मोहन त्रिपाठी की जमानत पर सुनवाई के लिए पॉक्सो कोर्ट ने पहले ही 11 सितंबर की तिथि कर रखी है।
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बालगृह बालिका कांड की आरोपी संस्था की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उसकी बेटी कंचनलता और पति मोहन त्रिपाठी जेल में बंद हैं। गिरिजा और कंचनलता की जमानत के लिए सीजेएम कोर्ट में चार सितंबर को प्रार्थनापत्र दिया गया था। गिरिजा और कंचनलता ने पुलिस पर साजिशन फंसाने का आरोप लगाया था। इसके अलावा 60 वर्ष की उम्र व दो वर्ष से कम सजा वाली धाराओं का हवाला देते हुए जमानत मंजूर करने की गुहार की थी। इसके बाद से सुनवाई टलती आ रही है। कोर्ट ने पुलिस से जमानत से पूर्व विभिन्न बिंदुओं पर आख्या तलब की थी।
सोमवार को एसआईटी की ओर से प्रस्तुत हुए विवेचक ने जमानत न देने के लिए नौ बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा। एसआईटी की ओर से कहा गया है कि साजिश नहीं, बल्कि अपराध के आधार पर ही उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। अपराध बेहद गंभीर है और अब तक के साक्ष्यों से इसमें उनकी संलिप्तता स्पष्ट हो रही है। प्रभावी होने के चलते जमानत पर बाहर आने पर सबूतों व गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका है। लिहाजा जमानत अर्जी खारिज होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने सोमवार को इस पर कोई सुनवाई नहीं की। तथ्यों के अवलोकन के बाद सुनवाई की अगली तिथि 11 सितंबर मुकर्रर कर दी। वहीं मोहन त्रिपाठी की जमानत पर सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में होगी। इसकी सुनवाई भी मंगलवार को होनी है।
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