महाल मंझरिया का दोआबा बनेगा तरक्की का द्वार
औद्योगिक विस्तार के लिए प्रशासन ने उपयुक्त मानी है दोआबा की भूमि
एनटीपीसी के मानक के अनुरूप है चिह्नित जमीन
शासन को जिला प्रशासन ने भेजा जा चुका है रिपोर्ट
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। घाघरा और छोटी गंडक नदी के दोआबा की हजारों एकड़ जमीन को देवरिया-सलेमपुर की तरक्की का द्वार बनाने की तैयारी चल रही है। इस क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार के लिए जिला प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए हैं। शासन की ओर से जमीन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। बिजली उत्पादन केंद्र बनाने के लिए पूर्व में जिला प्रशासन प्रस्ताव भेज चुका है। शासन की ओर से हरी झंडी मिल गई तो महाल मंझरिया सलेमपुर के तरक्की का द्वार खोल सकता है।
नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की ओर से तय मानक के अनुसार प्रशासन ने 1500 एकड़ जमीन की तलाश सलेमपुर के महाल मंझरिया गांव में घाघरा और छोटी गंडक नदी के दोआबा में की है। इसकी रिपोर्ट शासन को जिला प्रशासन ने भेज दी थी। करीब दो माह पूर्व शासन ने महाल मंझरिया गांव में खाली पड़ी एक फसली जमीन का ब्योरा औद्योगिक हब बनाने के लिए मांगा था। शासन स्तर से जमीन के स्थलीय निरीक्षण के लिए पिछले दिनों एक टीम भी आई थी। जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। महाल मंझरिया गांव का रकबा दस हजार एकड़ में फैला है। नदी की रेत पर बसे इस गांव में छिटपुट आबादी है, जो खेती के उद्देश्य से अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहती है। यहां के अधिकांश किसान बलिया और सीवान जिले के निवासी हैं। डीएम अमित किशोर ने बताया कि औद्योगिक विस्तार के लिहाज से महाल मंझरिया गांव की जमीन उपयुक्त है। शासन से जो भी रिपोर्ट मांगी गई थी, वह भेज दी गई है। प्रयास किया जा रहा है कि एनटीपीसी समेत औद्योगिक विस्तार यहां पर कराया जाए।
यह है महाल मंझरिया की भौगोलिक स्थिति
देवरिया। दोआबा के चिह्नित स्थान की दूरी राष्ट्रीय राज्यमार्ग सोनौली-देवरिया व बलिया मार्ग से 15 किलोमीटर, रामजानकी मार्ग से मात्र पांच किलोमीटर दूरी है। भटनी-वाराणसी रेलखंड पर स्थित तुर्तीपार रेलवे स्टेशन से 14 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर कोई भी राष्ट्रीय पार्क, सेंचुरी एवं रिजर्व फारेस्ट माइग्रेटी रूट 10 किलोमीटर के एरिया में नहीं है।
एनटीपीसी के मानकों को पूरा कर रहा चिह्नित जमीन
देवरिया। प्रशासनिक दृष्टिकोण से एनटीपीसी या औद्योगिक हब बनाने के लिए चिह्नित की गई जमीन सभी मानकों को पूरा कर रहा है। अफसरों की मानें तो परियोजना चालू होने से पूर्वांचल में नासूर बनी बिजली की समस्या से स्थायी निजात मिल जाएगी। इससे रोजगार का अवसर भी बढ़ेगा।
इनसेट
किसानों को नियमत: मिलेगा चार गुना मुआवजा
देवरिया। किसान दोआबा में सिर्फ गेहूं की फसल काटते हैं। एक फसली जमीन होने के कारण यह स्थान प्रशासन ने चिह्नित किया है। अगर परियोजना के लिए भूमि गई तो किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलेगा।
महाल मंझरिया में औद्योगिक हब बनाने की योजना चल रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री से भी मिला हूं। शासन को जिला प्रशासन के माध्यम से रिपोर्ट भेजी गई है। आगे की प्रक्रिया चल रही है।
-रविंद्र कुशवाहा, सांसद।