देवरिया। नगर विकास विभाग के कायदे कानून का पालन सिर्फ आम लोगों के लिए ही जरूरी रह गया है। साधन संपन्न व प्रभावशाली लोगों को नियमों के उल्लंघन की छूट है। जी हां, शहर के हालात कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं। शॉपिंग मॉल के बाद अब तमाम निजी चिकित्सकों के क्लीनिक और अस्पताल भी नियम विरुद्ध ढंग से तैयार किए गए हैं। शहर में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक क्लीनिक और अस्पताल का नक्शा पास नहीं है। बड़ी इमारतों में चल रहे इन अस्पतालों में न तो पार्किंग है और न ही अन्य जरूरी सुविधाएं। बावजूद नगर विकास विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। इसका खामियाजा आम राहगीरों को भुगतना पड़ता है।
नींव से लेकर छत निर्माण तक आम लोगों पर पालिका कर्मचारियों का पहरा चलता है। जरा सी लापरवाही पर निर्माण कर्ता को या तो निर्माणाधीन भवन का हिस्सा तोड़ना पड़ता है या फिर पालिका कर्मियों के शोषण का शिकार होना पड़ता है। डॉक्टरों के लिए नियम इससे इतर है। शहर में निजी नर्सिंगहोम और अस्पतालों की भरमार है। आवासीय क्षेत्रों में संचालित कई अस्पतालों ने बड़ी इमारतें बना रखी हैं। यहां दवा-उपचार के लिए रोजाना सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। व्यावसायिक कार्य वाले इन अस्पतालों में नियमानुसार पार्किंग की सुविधा होनी चाहिए। यह नक्शा पास कराने की महत्वपूर्ण शर्त भी है, मगर ज्यादातर अस्पतालों में कोई व्यवस्था ही नहीं है। दरअसल, अस्पताल संचालकों ने कभी नक्शा पास कराने की जरूरत ही नहीं समझी और न ही विभाग ने कभी रोकटोक की जहमत उठाई। कुछ ने नक्शा पास भी कराया तो निर्माण के समय मानक को दरकिनार कर दिया। निर्माण अवधि से लेकर अस्पताल संचालित होने तक नगर विकास विभाग व नगरपालिका इनकी लापरवाही पर मौन साधे है। मरीजों को लेकर आने वाली गाड़ियां बीच सड़क पर ही खड़ी की जा रही हैं।
‘नो पार्किंग’ का बोर्ड लगाकर कर ली इतिश्री
नियमों के प्रति अपनी जिम्मेदारी बताते हुए कई चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक व अस्पताल के सामने ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड लगाकर इतिश्री कर ली है, मगर यह स्पष्ट नहीं किया है कि मरीजों के वाहन कहां खड़े किए जाएं। ऐसे में सभी वाहन उसी बोर्ड के सामने ही सड़क पर खड़े होते हैं। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शुमार राघवनगर, कोतवाली चौराहा, ट्यूबवेल कॉलोनी, भटवलिया, न्यू कॉलोनी, सीसी रोड स्थित कई अस्पतालों के बाहर यह नजारा देखा जा सकता है। नगर विकास विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में चल रहे कई नामी चिकित्सकों के क्लीनिक का नक्शा पास नहीं है।
नोटिस भी दे चुका है विभाग
नाम न छापने की शर्त पर नगर विकास विभाग के एक जिम्मेदार ने बताया कि शहर के आठ चर्चित चिकित्सकों को बिना नक्शा पास कराए निर्माण के कारण नोटिस भी दिया जा चुका है। जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जारी है। इनमें कुछ चिकित्सक विभिन्न संगठनों में प्रमुख पदों पर आसीन हैं तो कुछ को बड़ी शोहरत हासिल है। विवादों में रहने वाले चिकित्सक भी इसमें शामिल हैं।
अफसर जागें तो दूर होगी पार्किंग समस्या
शहर की बेतरतीब यातायात व्यवस्था में सबसे बड़ा कारण वाहनों की पार्किंग का अभाव है। पूरे शहर में वाहन पटरियों या सड़क के बीच खड़े होते हैं। अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन कार्रवाई भी करता है तो निशाने पर सिर्फ ठेला-खोमचा या पटरी व्यवसायी आते हैं। अगर मॉल, अस्पताल जैसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग की बाध्यता के नियम का बस पालन करा दिया जाए तो आधी समस्या स्वत: दूर हो जाएगी।
बिना नक्शा पास कराए निर्माण कराना गलत है। यह मेरे संज्ञान में नहीं था। सभी अस्पतालों और क्लीनिक का ब्योरा लेकर जांच कराई जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को नोटिस देकर कार्रवाई भी होगी।
-रामकेश यादव, एसडीएम, सदर।