देवरिया। अनुदान का लाभ लेकर शौचालय निर्माण नहीं कराने वाले लाभार्थियों पर नगर पालिका प्रशासन सख्त रवैया अख्तियार करने की तैयारी में है। इसके लिए विभाग की ओर से करीब 500 लोगों को नोटिस भेजा जा चुका है। बार-बार चेतावनी के बावजूद निर्माण पूरा नहीं कराने वालों पर अब एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।
शहर को खुले से शौच मुक्त करने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को 12 हजार रुपये शौचालय निर्माण के लिए अनुदान दिए जा रहे हैं, वहीं शहरी वाशिंदों को दो किस्तों में आठ हजार रुपये दिया जा रहा है। पिछले वर्ष आए 3070 आवेदनों में से 1670 लोग पात्र चुने गए। 1581 के खाते में पहली किस्त भेजी गई है, जिसमें 500 से अधिक लोगों ने अनुदान का लाभ लेने के बावजूद शौचालय निर्माण शुरू नहीं किया। इसके चलते स्वच्छता अभियान प्रभावित हो रहा है। 20 लाख रुपये से अधिक सरकारी धन का बंदरबांट हो गया है। कई ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्हें दोनों किस्त का भुगतान कर दिया गया है लेकिन उनकी ओर से फाइनल निर्माण की फोटो उपलब्ध नहीं कराया गया है। इन लोगों को नगर पालिका की ओर से नोटिस जारी किया जा चुका है। हालांकि निर्माण पूरा नहीं होने का एक कारण नगर पालिका की तंगहाली भी है। शहर में जीवन-यापन करने वाले अधिकांश परिवार दो वक्त की रोटी बदन ढकने के लिए कपड़े के अलावा बचत नहीं कर पाते। यही कारण है कि घर में शौचालय का सपना पूरा नहीं हो पाता। स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिए जा रहे आठ हजार रुपये से शौचालय निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पाता। इसे ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष शासन ने नगर पालिका को स्वयं के मद से 12 हजार रुपये अतिरिक्त धनराशि लाभार्थी के खाते में भेजने का निर्देश दिया था। इसे नगर पालिका आज तक शुरू नहीं कर पाई है। आठ हजार रुपये में शौचालय निर्माण पूरा करना गरीबों के लिए चुनौती बनी हुई है।
दर्ज होगी एफआईआर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पहली किस्त का लाभ ले चुके अधिकांश लाभार्थियों ने निर्माण कार्य शुरू ही नहीं किया है। कई ऐसे लोग भी हैं जो दूसरी किस्त का लाभ लेकर निर्माण पूरा नहीं किए। इन लोगों को नगरपालिका की ओर से नोटिस जारी की गई है। इन पर एफआईआर दर्ज कर अवमुक्त धनराशि भू-राजस्व की भांति ब्याज सहित आरसी के माध्यम से वसूल की जाएगी।
-राधेकृष्ण, प्रबंधक स्वच्छ भारत मिशन नगरपालिका।