छठ घाट पर भगवान सूर्य के पूजा के बाद सुहगीन महिलाओं ने एक दूसरों को सिंदूर लगाकर सौभाग्यवती की कामना किया
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बरहज। छठ महापर्व पर भोर से ही छठ घाटों पर महिलाएं पानी में खड़ा हो सूर्यदेव के उदय होने की प्रतीक्षा कर रही थीं। व्रती माताओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पुत्रों के दीर्घायु और परिवारी की सुख समृद्धि की कामना की। जबकि मान्यता है कि छठ मैया के आशीर्वाद से माताओं की सूनी गोद भरती हैं। घाट पर उपजिलाधिकारी अरुण सिंह के साथ उनकी पत्नी सुष्मिता सिंह ने भी अर्घ्य दिया।
शुक्रवार की भोर में माताएं अखंड दीप के साथ मंगल गीत गाती हुई घाटों की ओर चल दीं। साथ में आगे-आगे परिवारीजन प्रसाद आदि सिर पर रखे हुए चल रहे थे। माताएं पानी में खड़ा होकर भाष्कर के उदय होने का इंतजार करने लगीं। चारों तरफ टिमटिमाते दीप जहां घाटों पर छटा बिखेर रहे थे। वहीं मंगलगीत से समूचा क्षेत्र गुंजायमान था। भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं ठेकुआ, पूड़ी, खजूर आदि चढ़ाए गए। नगर के सीता घाट, रामघाट, नया घाट, तुलसी घाट, बरहना घाट सहित 11 घाटों पर लवरछी, बालू छापर, मेहियवां, पिपरा कोट, रामपुर, मोहावं सहित आसपास के गांवों की करीब 40 हजार महिलाओं ने अर्घ्य दिया। घाट पर कोसी भरने वालों के साथ आए युवा डीजे की धुन पर जमकर थिरके। पूरे दिन छठ गीतों से नगर सहित आसपास के क्षेत्र गुलजार रहे।