देवरिया। पीड़ितों के साथ एजेंट को पकड़ने लखनऊ गई पुलिस को निराशा हाथ लगी है। हालांकि एजेंट बार-बार थोड़ी देर में आने की बात कहता रहा। अंतत: वह न तो रुपये लेने आया और न ही पासपोर्ट वापस करने। काफी देर तक लखनऊ में इधर-उधर खोजने के बाद पीड़ित और पुलिसकर्मी लौट आए।
दरअसल दो महीने पहले किसी के माध्यम से सूचना मिली थी कि विदेश में एक कंपनी को मजदूरों की जरूरत है। इसके बाद 53 लोगों ने अपना पासपोर्ट लखनऊ के एक एजेंट को दे दिया। उसने सभी को बुलाया और वहां से कुंडा लेकर चला गया। सभी से 25-25 हजार रुपये मांगा। किसी ने नहीं दिया तो सभी का पासपोर्ट रखकर उन्हें वापस कर दिया। वापस लौटने के बाद लोगों को शक हुआ तो पुलिस से शिकायत की। पूर्व एसपी राजीव मल्होत्रा ने दो सिपाहियों को पीड़ितों के साथ जाने आदेश दिया। संयोग से दोनों की तबीयत खराब हो गई थी। दूसरे दिन कोतवाली से दो सिपाही भेजे जाने थे, लेकिन किसी कारणवश वे नहीं गए। मंगलवार की रात को कोतवाली से दो सिपाही और पीड़ित लखनऊ गए। वहां एजेंट को फोन कर बुलाते रहे, लेकिन वह नहीं आया। देर शाम तक इंतजार करने के बाद वे लौट आए। सदर कोतवाल नीतीश श्रीवास्तव का कहना है कि दो सिपाहियों को लखनऊ भेजा गया था पर एजेंट नहीं आया।