देस ही के मदरपाली गांव के पास माइनर ओवरफ्लो से डूबी किसानों की फसलें
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देवरिया। एक तरफ किसानों के खेत पानी को तरस रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मुंडेरा-दिघवा पौटवा नहर से निकली मदरपाली माइनर जगह-जगह ओवरफ्लो हो रहा है। टेल की ओर झाड़-झंखाड़ से पटा होने के कारण माइनर का पानी पटरियों को ओवरफ्लो कर खेतों में जा रहा है। इससे किसानों के करीब दस एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। किसानों ने सिंचाई विभाग के अफसरों के प्रति नाराजगी है। गांव के पास मदरापाली माइनर के ओवरफ्लो होने से मदरपाली गांव के जीउत, राजवंशी कुशवाहा, शारदा, कांता यादव, जंगी, श्यामजी यादव सहित करीब दर्जन भर किसानों की दस एकड़ गेहूं की फसलें पानी में डूब गई हैं। अपनी फसल नष्ट होने को देख किसान चिंतित हैं, क्योंकि अभी भी पानी खेतों में जा रहा है। यह सभी लोग पंपिंगसेट से अपनी सिंचाई पहले ही कर चुके थे। किसानों का कहना है कि जब जरूरत थी, तब नहर में पानी नहीं आया और अब सिंचाई के बाद ओवरफ्लो कर खेतों में घुस रहा है। किसानों ने मुआवजा देने की मांग की है। गौरतलब है कि नहरों की सफाई के लिए 15 दिसंबर तक की अवधि बीत चुकी है, बावजूद कई नहरें अब भी झाड़-झंखाड़ से पटी हैं। नहर से सिंचाई की आस में बैठे किसानों की फसल सूख रही है। जिन नहरों या माइनरों में पानी पहुंचा भी है तो लेबल नीचे होने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा। देसही देवरिया क्षेत्र में करीब 70 प्रतिशत किसानों की निजी साधनों से खेतों की सिंचाई कर लेने के बाद ही नहरों में पानी आया है। क्षेत्र में तीन रजवाहे और करीब 66 माइनर हैं। सिरसिया, देवरिया रजवाहों में पानी कमोवेश चल रहा मगर, द्वारिका रजवाहा की हालत बदतर है। उससे जुड़े ज्यादातर माइनर अभी भी बिल्कुल सूखे पड़े हैं। सफाई के नाम पर हुए खेल के चलते भी किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नौतन के किसान रामध्यान, हेतिमपुर के रामकेवल, शाजहांपुर के अनवर, मुंडेरा के छोटेलाल आदि का कहना है कि नहर में पानी आने का कोई लाभ नहीं है। पहले तो इंतजार में फसलें बर्बाद हुई और अब आई भी तो अंतिम छोर तक नही पहुंच रही।