देवरिया में उलझा भाजपा के टिकट का मांझा
सदर सीट पर दावेदारों की लंबी कतार से चयन में उलझा नेतृत्व
अन्य सीटों पर नाम घोषित होने के प्रत्याशी तय नहीं होने से बढ़ी बेकरारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। लोकसभा के चुनावी समर में भाजपा के टिकट को लेकर ऊहापोह बढ़ता जा रहा है। दावेदारों की लंबी कतार और उनके मजबूत पैरोकारों की बदौलत पार्टी नेतृत्व खुद टिकट पर कोई निर्णय नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि बार-बार तिथि टलती जा रही है। शनिवार को भी टिकट की घोषणा टाल दी गई। अब आठ अप्रैल तक इस पर कोई फैसला लिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सदर सीट से किसी ऐसे चेहरे की तलाश हो रही है, जो हर वर्ग को साध सके और कलराज मिश्र जैसे दिग्गज नेता के हटने से हो रही रिक्तता को भी भर सके। फिलहाल नेतृत्व चार-पांच नामों पर उलझा हुआ है। पार्टी हाईकमान की ओर से निर्णय नहीं ले पाने से देवरिया में टिकट का मांझा उलझ गया है।
जिले में सातवें चरण के अंतर्गत 19 मई को मतदान होना है। इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया 22 अप्रैल से ही शुरू हो जाएगी। कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन से प्रत्याशी के नाम लगभग तय हो चुके हैं। अब सबकी निगाह भाजपा के टिकट पर है। माना जा रहा है कि भाजपा के टिकट के बाद ही जिले में चुनावी माहौल को दिशा मिलेगी। प्रत्याशी की तस्वीर को लेकर बेकरारी सिर्फ आमजन में ही नहीं है, बल्कि पार्टी कार्यकर्ता भी बेचैन हैं। मौजूदा हालात पर नजर डालें तो सत्ताधारी दल से टिकट के लिए एक दर्जन से अधिक चेहरे कतार में हैं। टिकट को लेकर खींचतान इस कदर है कि नेतृत्व भी कोई फैसला नहीं कर पा रहा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विभिन्न स्तरों से होते हुए नेतृत्व ने चार नामों को अंतिम रुप से चुना है। इसमें एक नाम की पैरवी खुद सांसद कलराज मिश्र कर रहे हैं, जबकि तीन अन्य नाम ऐसे हैं, जो पहली बार लोकसभा के मैदान में उतरेंगे। तीनों की पैरवी शीर्ष नेतृत्व से जुड़े अलग-अलग नेता कर रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम का एलान शनिवार को होना था, लेकिन अंतिम समय में भी सहमति नहीं बनने से इसे टाल दिया गया। अब फिर से पार्टी ने विचार शुरू किया है। संभावना जताई जा रही है कि अव्वल इनमें से ही किसी एक नाम पर सबको राजी करते हुए प्रत्याशी घोषित किया जाएगा। इसके बाद भी तालमेल नहीं बना तो अंतिम समय में किसी चौंकाने वाले नाम पर भी निर्णय हो सकता है।