मैनेज टेंडर के खेल में डूबे ठेकेदारों के 1.06 करोड़
पांच कार्यों पर गुपचुप ढंग से भुगतान कराने की थी तैयारी
टेंडर निरस्त होने से सकते में जिला पंचायत अध्यक्ष का खेमा
बढ़ती जा रही रामप्रवेश की दुश्वारियां, अभी और कसेगा शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष से करीबी और अति विश्वास में ठेकेदारों के 1.06 करोड़ रुपये डूब गए। ठेकेदारों को यह उम्मीद भी नहीं थी कि मैनेज टेंडर के जिस खेल में वह वर्षों से मलाई काटते आ रहे हैं, वही उनके लिए घाटे का सौदा बन जाएगा। दो वर्ष पुराना टेंडर निरस्त होने के बाद रामप्रवेश खेमा सकते में है। उधर, प्रशासन उन पर अभी और शिकंजा कसने की तैयारियों में जुटा हुआ है।
करीब छह माह पहले तक जिला पंचायत रामप्रवेश के सितारे बुलंद थे। ग्राम पंचायत की राजनीति से उठकर जिला पंचायत तक धमक और फिर जिले के प्रथम नागरिक की कुर्सी तक पहुंच कर रामप्रवेश ने अपनी धाक जमाई थी। मगर दीपक मणि अपहरण कांड के बाद स्थिति ही उलट गई है। एक के बाद एक रामप्रवेश की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। पहले ईनामी अपराधी की तरह जेल की सलाखों में पहुंचा और फिर गैंगेस्टर में निरुद्ध कर दिया गया। शासन ने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार छीनते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिया। कोर्ट से जमानत पर बाहर आने के बाद रामप्रवेश ने अपने अधिकार पाने की कवायद शुरू की, मगर राहत तो नहीं मिली अलबत्ता तल्ख टिप्पणियों से हाईकोर्ट ने रही सही उम्मीदें भी तोड़ दीं। अब रामप्रवेश के सामने कुर्सी का बचाने का संकट गहरा गया है। उधर, प्रशासन ने रामप्रवेश के कार्यकाल में दो वर्ष पूर्व हुए टेंडर को निरस्त कर एक और तगड़ा झटका दिया है। सूत्रों की मानें तो जिन पांच कार्यों के टेंडर निरस्त हुए हैं, उनमें आवेदन करने वाले रामप्रवेश के करीबी ही हैं। तब ई-टेंडरिंग की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण निविदा प्रकाशित होते ही उसे मैनेज कर लिया गया था। टेंडर डालने वालों को यह आश्वस्त किया गया था कि हर हाल में काम उन्हें ही मिलेगा। कोई दूसरा इसमें दखल न दे, इसलिए करीबी ठेकेदारों ने पहले ही काम भी करा दिया। अध्यक्ष के अपने खेमे का होने के कारण वह बाद में भुगतान करा लेने की उम्मीद लगाए बैठे थे। यही नहीं कुछ तो इस भरोसे थे कि चयनित काम पर दूसरे विभाग के माध्यम से काम करा लिया जाए और फिर जब टेंडर खुलेगा तो उससे भी भुगतान हो जाएगा। समय का पहिया ऐसा घूमा कि दोहरे भुगतान की उम्मीदें तो टूटी ही, जो धनराशि खर्च की गईं, वह भी डूब गई। करीबी ठेकेदार अब अपना सिर पटक रहे हैं। एक करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की भरपाई कैसे करें, यह चिंता उन्हें सता रही है।
रामप्रवेश पर अभी और कसेगा शिकंजा
अनियमितता पर शासन ने नोटिस देकर मांगा है जवाब
पद से हटाने के लिए भी चल रही है कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव उर्फ बबलू की मुश्किलें अभी कम होने वाली नहीं है। प्रशासन उस पर अभी और शिकंजा कसने की तैयारी में है। वित्तीय व प्रशासकीय कार्यों में अनियमितता के एक मामले में रामप्रवेश को नोटिस देकर शासन ने जवाब तलब किया है। तय समय सीमा के बाद भी जवाब नहीं देने पर शासन अगली कार्रवाई की जाएगी।
कई जिला पंचायत सदस्यों ने शपथ पत्र देकर जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि जिला पंचायत एक्ट 1961 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत अध्यक्ष ने नियमित बैठक नहीं बुलाई और कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी समितियों का गठन नहीं किया। अध्यक्ष के उपयोग में लिए गए वाहन को अधिक किराए की दर पर 1.79 लाख रुपये राजस्व की क्षति की गई है। 13वें वित्त आयोग के ब्याज की धनराशि के सापेक्ष शासन की बिना स्वीकृति लिए निविदा मांगी गई, जनसेवा संस्थान के नाम से जिला पंचायत परिसर में आवंटित आवास की मरम्मत व निर्माण में अनियमितता बरतने, राज्य वित्त आयोग की धनराशि से कार्यों व राजकीय धन के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। डीएम की जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने के बाद शासन ने अध्यक्ष को नोटिस देकर जवाब तलब किया था। इसके लिए 15 दिनों की मोहलत दी थी। 20 नवंबर को जारी नोटिस दो दिन बाद अध्यक्ष का तामिल कराई गई। सूत्रों के मुताबिक अभी तक अध्यक्ष की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। लिहाजा अगली कार्रवाई तय मानी जा रही है। इस बाबत एएमए उमेश चंद्र पटेल ने बताया कि नोटिस शासन स्तर से दी गई थी। लिहाजा फैसला भी वहीं से होना है।