मरीज की मौत के बाद इमरजेंसी में हंगामा
तीमारदारों का नाराजगी देख भागे कर्मचारी, आधे घंटे ठप रही इमरजेंसी
गायब थे ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट के मृत घोषित करने पर भड़के
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार की सुबह डॉक्टर नहीं थे। ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट ने बीमार बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया तो तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टर की अनुपस्थिति में समय से इलाज नहीं मिल पाने का आरोप लगाते हुए हो-हल्ला मचाने लगा। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत कराया। हंगामे से करीब आधे घंटे तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही।
पथरदेवा गांव निवासी 60 वर्षीय हरिनारायण मंगलवार को सुबह खेत में काम कर रहे थे। अचानक सीने में दर्द हुआ और गिर पड़े। परिजन आनन-फानन में उन्हें लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. सुनील सिंह अनुपस्थित थे। फार्मासिस्ट रितेश सिंह ने जांच के बाद मरीज को मृत घोषित कर दिया। इस पर साथ में आए लोग भड़क गए और डॉक्टर की तलाश करने लगे। घरवालों का आरोप था कि अगर डॉक्टर रहते और समय से इलाज मिला होता तो हरिनारायण की जान बच गई होती। इसे लेकर फार्मासिस्ट और तीमारदारों में तकरार हुआ। विवाद बढ़ने की सूचना पर फोर्स के साथ पहुंचे कोतवाल विजय नारायण ने लोगों को शांत कराया। इससे करीब आधे घंटे तक इमरजेंसी में इलाज ठप रहा। कोतवाल विजय नारायण ने बताया कि बुजुर्ग की मौत के बाद लोग हंगामा किए थे। समझा बुझाकर लोगों को हटाया गया। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि इमरजेंसी पर लाए गए बुजुर्ग की मौत हो चुकी थी। डॉक्टर कुछ देर के लिए कहीं गए थे, बाद में आ गए। बेवजह लोगों ने हंगामा किया था।
बाहरी युवकों की रहती है दखलंदाजी
देवरिया। इमरजेंसी में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय और स्वीपर के अलावा तीन से चार युवक प्राइवेट तरीके से मरीजों का इलाज करते हैं। इसे लेकर पूर्व में कई बार बवाल हो चुका है। रात को शराब के नशे में यह प्राइवेट युवक मरीजों को लेकर आने वाले तीमारदारों के साथ बदसलूकी भी करते हैं। कर्मचारियों की मिलीभगत से काफी दिनों से इनका वर्चस्व जमा हुआ है। डॉ. अजीत नरायण मिश्र ने इसकी शिकायत सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से भी की है।