जिला महिला अस्पताल के आरो प्लांट का दो माह से जला मोटर।
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देवरिया। शाम 4 बजे के बाद महिला अस्पताल पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को भर्ती नहीं किया जाता है। रात को सीजेरियन न होने का हवाला देकर डॉक्टर मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं। मजबूरी में लोगों को निजी नर्सिंग होम में जाना पड़ता है। दिन में भी यहां अव्यवस्थाएं हावी हैं। जिम्मेदारों की बेरुखी से उन्हें ही उपचार मिलता है, जिन्हें दलाल चाहते हैं।
जिले का इकलौते महिला अस्पताल की लचर व्यवस्था और डॉक्टरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। ओपीडी से लेकर ओटी तक दलालों का नेटवर्क सक्रिय है, जिससे मरीजों का बचना मुश्किल है। सोमवार को ओपीडी में 371 महिलाओं का इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ था। ओपीडी में डॉ.वाईपी प्रसाद, डॉ.आचल, श्वेता मिश्रा और प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना के तहत एक नर्सिंगहोम के संचालक डॉ.अशोक राय मरीजों का इलाज कर रहे थे। यहां पर सीएमएस भी मौजूद रहीं। वहीं डॉ.रीता सिंह ड्यूटी से गायब रही। वाईपी प्रसाद, अशोक राय और सीएमएस करीब 12 बजे ओपीडी से चली गई। सीएमएस महिला अस्पताल डॉ.माला सिन्हा ने बताया कि महिला अस्पताल में डीजीओ के नौ पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ दो की तैनाती है और तीन को अटैच किया गया है। डीजीओ व सर्जन की कमी से रात को ओटी नहीं चलती। मरीजों को शाम 5 बजे के बाद सिर्फ नार्मल इलाज मिलता है, अन्य को रेफर करना पड़ता है। तीन और डीजीओ मिल जाए तो रात को ओटी चलाने का प्रयास किया जाएगा।
बाहर हो रहा अल्ट्रासाउंड, 12 बजे तक खून की जांच
देवरिया। अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला था। यहां 10 जुलाई तक इसके बंद रहने की सूचना चस्पा थी। गर्भवती महिलाओं को 500 रुपये खर्च कर निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। कतौरा गांव की शिब्बू खातून, रामगुलाम टोला की अनामिका गुप्ता, बड़की भेड़ापाकर से आई सोनम गुप्ता ने बताया कि दो दिन से लौट रहे है। एक दिन में सिर्फ 30 की ही जांच होती है। सुबह 7 बजे से नंबर लगाए थे। 10 बजे कर्मचारियों ने बताया कि रेडियोलाजिस्ट शिव प्रकाश श्रीवास्तव छुट्टी पर हैं। वहीं ओपीडी में आई महिलाओं को पैथालॉजी में ब्लड जांच के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। 12 बजे तक ही जांच के लिए ब्लड लिया जा रहा है। इसके चलते अधिक महिलाओं को निजी पैथालॉजी पर जांच के लिए जाना पड़ रहा है।
दो माह से आरओ प्लांट का जला मोटर
देवरिया। मरीजों को ठंडा पानी पीने के लिए लाखों रुपये खर्च कर कैंपस में आरओ प्लांट लगा है। दो माह से इसका मोटर जला हुआ है। इसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को ठंडा पानी पीने को नहीं मिल रहा है।