एसटीएफ के रडार पर बीएसए कार्यालय
कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ मास्टरमाइंड के करीबियों पर नजर
सिद्धार्थनगर की तरह देवरिया में भी हो सकता है बड़ा पर्दाफाश
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फर्जी शिक्षक नियुक्ति का पर्दाफाश होने के बाद जिले का बीएसए दफ्तर भी एसटीएफ के रडार पर है। यहां की गतिविधियों पर एसटीएफ ने निगाह जमा ली है। शिक्षक भर्ती के मास्टरमाइंड के इसी जिले का होने से उन्हें आशंका है कि जाली दस्तावेजों के माध्यम से यहां भी कई शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। छह शिक्षकों के पकड़ में आने के बाद उनका शक और गहरा गया है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ यहां जल्द ही धमक सकती है। बीएसए कार्यालय के कुछ कर्मचारी उनके निशाने पर हैं।
वर्ष 2009-10 में हुई शिक्षक भर्तियों में व्यापक धांधली उजागर हुई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 100 से अधिक फर्जी शिक्षक पकड़ में आए हैं। शासन ने इसकी वृहद जांच एसटीएफ को सौंपी है। पिछले महीनों एसटीएफ ने सिद्धार्थनगर में जिले में 38 फर्जी शिक्षकों की भर्ती के मास्टरमाइंड राकेश सिंह को गिरफ्तार किया था। राकेश भाटपाररानी के कुईंचंवर गांव का निवासी है। राकेश ने जाली दस्तावेजों के आधार पर कई शिक्षकों की नियुक्ति कराई थी। सिद्धार्थनगर में पकड़े गए फर्जी शिक्षकों में भी कई देवरिया के ही थे। इस मामले की जांच में जुटी एसटीएफ को शुरू से ही आशंका रही है कि राकेश ने देवरिया में भी तमाम लोगों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक बनवाया है। अब शासन स्तर से चल रही जांच में छह शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिलने और पांच के संदिग्ध होने के बाद एसटीएफ का शक गहरा गया है। देवरिया बीएसए कार्यालय को भी रडार पर ले लिया है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक गोपनीय ढंग से कार्यालय की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। छह फर्जी शिक्षकों के साथ मास्टरमाइंड के करीबी व तत्कालीन अफसरों-कर्मचारियों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। एसटीएफ यह देख रही है कि इन शिक्षकों के संपर्क कहां-कहां हैं और पूरे मामले में किसकी संलिप्तता हो सकती है। इसके जरिए वह अन्य फर्जी शिक्षकों तक भी पहुंचने की कोशिश में है।
मुकदमा दर्ज कराने में हिचक रहे हैं अफसर
देवरिया। सत्यापन में छह शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिलने के बाद शासन के विशेष सचिव ने इनकी नियुक्ति निरस्त करते हुए केस दर्ज कराने और रिकवरी का आदेश दिया है। 25 अप्रैल के इस आदेश के दस दिनों बाद भी सिर्फ वेतन रोककर अफसरों ने इतिश्री कर ली है। अब न तो केस दर्ज हुआ है और न ही रिकवरी की कार्रवाई शुरू हुई है। जिले के विभिन्न स्कूलों पर तैनात 11 शिक्षकों के दस्तावेज में गड़बड़ी की शिकायत पर शासन ने जांच के निर्देश दिए थे। अब तक की जांच में छह शिक्षक संजय यादव, विमल यादव, वीरेंद्र यादव, मीरा सिंह, मीरा यादव और विनय यादव के दस्तावेज फर्जी होने की पुष्टि हुई है। एडी बेसिक की इस रिपोर्ट के आधार पर शासन के विशेष सचिव वेद प्रताप सिंह ने 25 अप्रैल को पत्र जारी कर इनकी नियुक्ति निरस्त करते हुए अब तक हुए वेतन भुगतान की रिकवरी का आदेश दिया था। संदेह के घेरे में आए शेष पांच शिक्षक अनिल यादव, वंदना यादव, सुनील यादव, सरोज यादव, बृजानंद यादव के वेतन भुगतान पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी थी। शासन के इस पत्र के बाद बीएसए ने सोमवार को सभी 11 शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दी, लेकिन अन्य किसी कार्रवाई के लिए अब तक कदम नहीं उठाया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जानबूझकर कार्रवाई में देरी की जा रही है, जिससे शिक्षकों को राहत पाने का पर्याप्त मौका मिल सके। बहरहाल, केस दर्ज कराने के सवाल पर बीएसए ओमप्रकाश यादव का कहना था कि वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। आगे शासन का जो भी निर्देश मिलेगा, उसके अनुरूप कार्रवाई होगी।
अब गिड़गिड़ाने लगे शिक्षक
वर्ष 2014 में शिकायत के बाद सत्यापन के लिए अभिलेख प्रस्तुत करने से बार-बार इन्कार कर रहे शिक्षक अब शासन की कार्रवाई के बाद बैकफुट पर हैं। नौकरी खतरे में देख वह अफसरों के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। पिछले दो दिनों से बीएसए कार्यालय पहुंच रहे एक शिक्षक का कहना है कि उसके खिलाफ साजिश हुई है। सारे दस्तावेज वैध हैं। बावजूद उसे फर्जी कहा जा रहा है। हालांकि शिक्षकों का यह पैंतरा नया नहीं है। इसके पूर्व में भी जब कभी जांच में तेजी आती थी, वह अपने प्रभाव के बल पर फाइल दबवा देते थे। असहयोग की बात कह नोटिस थमाई जाती तो रिसीव भी नहीं करते थे। वर्ष 2014 से 16 के बीच कई बार उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन उन्होंने कभी भी रुचि नहीं दिखाई।