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बारिश पर भारी पड़ी भक्तों की आस्था

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रुद्रपुर। सावन के पहले सोमवार को भगवान इंद्र भी शिवभक्तों का रास्ता नहीं रोक पाए। मूसलाधार बारिश पर शिवभक्तों की आस्था भारी पड़ी। महाकाल के सदृश्य दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर बारिश में भी भक्तों का रेला उमड़ा। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
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सोमवार को सुबह तीन बजे से ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। मानो श्रावण मास के पहले दिन बारिश के देवता इंद्र भी शिव का जलाभिषेक कर रहे हों। बावजूद इसके शिवभक्तों का जत्था पानी में भीगकर अहले सुबह से ही दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पहुंचने लगा। भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट सुबह तीन बजे खोल दिए गए। बरहज स्थित पवित्र सरयू नदी से जल भर कर कांवड़ियों का जत्था आधी रात को चल दिया। महेन में बाबा महेंद्रनाथ को जल चढ़ाकर कांवड़िये हर-हर, बम-बम का जयघोष करते हुए पैदल रुद्रपुर के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पहुंचे। कांवड़ियों का पहला जत्था सुबह तीन बजे बाबा के दरबार में पहुंचा। दोपहर 12 बजे तक सरयू नदी से जल भर कर 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर कांवड़ियों का कई जत्था दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करता रहा। श्रावण मास के मद्देनजर मंदिर पर ठहराव और पथ प्रकाश का बेहतर इंतजाम किया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में अर्धरात्रि से ही मेला परिसर में कई थानों की फोर्स लगा दी गई। बारिश के कारण मंदिर पर लगने वाला मेला फीका रहा। पूजन के बाद श्रद्धालु मेल में जाने के बजाय घर पहुंचने के लिए आतुर दिखे। इस कारण मेले में चहल पहल कम देखी गई।
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