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सरकारी विभागों पर नगर पालिका का एक करोड़ बकाया

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सरकारी विभागों पर नगर पालिका का एक करोड़ बकाया
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डीएम भी 6.14 लाख के बकाएदार, चार साल में फाइनल नहीं किया गृहकर-जलकर का हिसाब
बिजली निगम पर करीब 40 लाख बकाया
देवरिया। जलकर-गृहकर बकाए पर आम लोगों को बात-बात में नोटिस थमाने वाली नगर पालिका सरकारी विभागों के आगे घुटने टेक रही है। 37 विभागों पर एक करोड़ से अधिक टैक्स बकाया होने के बावजूद हुक्मरान इनपर चुप्पी साधे बैठे हैं। कई विभाग ऐसे हैं जिन्होंने दस साल से अपना हिसाब फाइनल ही नहीं किया है। बड़े बकाएदारों की सूची में डीएम भी शामिल हैं। जिलाधिकारी कार्यालय पर नगर पालिका का छह लाख 14 हजार 460 रुपये तो जिला पंचायत पर 17 लाख 71 हजार 838 रुपये वित्तीय वर्ष 2019-20 तक का बकाया है।
नगर पालिका के राजस्व में जलकर-गृहकर का महत्वपूर्ण योगदान है। मौजूदा समय में शहर के करीब 18 हजार भवनों से नगर पालिका जलकर, गृहकर वसूलती है। इसमें 51 सरकारी भवन शामिल हैं। इनपर सालाना डिमांड 22 लाख के करीब है। जलकर-गृहकर से पालिका को पिछले वर्ष 1.94 करोड़ की आय हुई थी। इस मद से हुई आमदनी को नगर पालिका शहर में सड़क, नाली आदि विकास कार्यों पर खर्च करती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष का डिमांड सहित कुल बकाया जोड़ दें तो सभी विभागों का योग 1.22 करोड़ है।
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इनसेट
पालिका की सुस्ती से नहीं जमा कर रहे टैक्स
नगर पालिका की सुस्ती के चलते सरकारी विभाग जलकर-गृहकर जमा करने में हर साल आनाकानी करते हैं। यही कारण है कि सरकारी भवनों पर बकाया बढ़ता जा रहा है। साल 2018 में 23 विभागों पर करीब 63 लाख बकाया था। जो अब 37 विभागों पर एक करोड़ चार लाख 931 रुपये हो गया है।
इनसेट
बकायेदारों के खिलाफ आरसी जारी करा सकती है नगर पालिका
जो विभाग लंबे समय से नगर पालिका का टैक्स नहीं जमा कर रहे उनके खिलाफ पालिका नोटिस देने के अलावा आरसी जारी कराने जैसे कदम उठा सकती है। ईओ और चेयरमैन की संस्तुति पर डीएम की ओर से बड़े बकाएदार विभागों के विरुद्ध आरसी जारी करने का प्रावधान है। इससे उन विभागों का वित्तीय खाता भी सीज हो सकता है।
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ये विभाग हैं नगर पालिका के बड़े बकायेदार
विभाग बकाया
विद्युत निगम 40.34 लाख
जिला पंचायत 17.71 लाख
जिलाधिकारी 6.14 लाख
उप खंड अधिकारी 5.92 लाख
सीएमएस देवरिया 5.97 लाख
सीएमओ 2.11 लाख
उप कृषि निदेशक 1.5 लाख
गांधी आश्रम 1.32 लाख
नलकूप अनुरक्षण खंड 1.44 लाख
सिंचाई खंड द्वितीय 1.10 लाख
बीएसएनएल 1.87 लाख
एसएसबीएल इंटर कॉलेज 1.33 लाख
पर्यटन विभाग 3.30 लाख
केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ 3.30 लाख
वर्जन
जिन विभागों ने पिछले वित्तीय वर्ष का जलकर-गृहकर जमा नहीं किया है उन्हें दो बार नोटिस भेजा जा चुका है। कुछ विभाग टैक्स जमा कर रहे हैं। लंबे समय से बकाया वाले विभागों से कर वसूल करने की रणनीति बनाई जा रही है।
- सत्यप्रकाश सिंह, ईओ नगर पालिका।
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