यूपी के आजमगढ़ में पांच साल पहले मर चुके व्यक्ति से भी पुलिस को शांति भंग का खतरा है। तभी तो पुलिस ने शांति व्यवस्था बहाल रखने के लिए सीआरपीसी की धारा 107/116 में उसका चालान कर दिया।
एसडीएम कोर्ट से जारी नोटिस पाने के बाद परिवार के लोग तो अवाक हैं ही, आसपास के लोग भी पुलिस की कारगुजारी पर आश्चर्य जता रहे हैं।
आजमगढ़ में मुबारकपुर थाना क्षेत्र के पुरानी दक्षिणी मुहल्ला निवासी रामनाथ का पड़ोसी से संपत्ति का विवाद चल रहा है। उनकी तीन संतानों में लालजी चौरसिया की 22 जनवरी 2009 में मौत हो चुकी है।
इस बीच 23 दिसंबर 2013 को रामजी के परिवार के लोगों का पड़ोसी से फिर विवाद हो गया। मामला थाने तक पहुंच गया। इसके बाद मुबारकपुर के चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार पांडेय ने दोनों पक्षों के लोगों का शांति भंग में चालान कर दिया।
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उन्होंने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि जिन लोगों का चालान किया जा रहा है, उनमें सभी दोषी हैं या नहीं, जिंदा है भी या नहीं। इसी क्रम में पांच वर्ष पूर्व मर चुके लालजी चौरसिया को भी पुलिस ने 107/116 में निरुद्ध कर दिया।
लालजी की बहन शीला चौरसिया ने बताया कि मेरे परिवार वालों को पुलिस की इस कारस्तानी की जानकारी 20 जनवरी 2014 को तब हुई, जब उन्हें एसडीएम सदर कोर्ट से 10 जनवरी को जारी नोटिस मिला।
यह नोटिस जमानत कराने के लिए जारी किया गया था। शीला पुलिस की इस कार्रवाई के विरुद्ध अधिकारियों के यहां दौड़ लगा रही हैं। इस बाबत मुबारकपुर के थानाध्यक्ष शमशेर बहादुर सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी की जा रही है कि किसकी गलती से ऐसा हुआ।
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