देश ही नहीं विदेश में अपनी विद्वता का लोहा मनवाया
जगदगुरु रामभद्राचार्य ने भार्गवराघवीयम, अरुंधति महाकाव्य, ब्रहृमसूत्र नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा है। उन्होंने संस्कृत व हिंदी में अपनी रचनाएं लिखीं। इन्ही रचनाओं के लिए उन्हें साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञान पीठ पुरस्कार मिला है। स्वयं दृष्टिबाधित होते हुए भी उन्होंने देश ही नहीं विदेश में अपनी विद्वता का लोहा मनवाया। विश्वविद्यालय के पीआरओ एसपी मिश्रा ने दावा किया कि जगदगुरु अब तक लगभग 250 पुस्तकें लिख चुके हैं।