बम निरोधक दस्ता की छह सदस्यीय टीम ने लगभग ढाई घंटे तक विभिन्न यंत्रों से जांचकर बम को निष्क्रिय किया। टीम के प्रभारी कौशल किशोर, संजय सिंह, आलोक रंजन, बुद्ध प्रकाश, सुनील कुमार व मो. नौशाद ने काफी मशक्कत की। सभी बुलेटप्रूफ जैकेट व हेलमेट लगाकर काम करते रहे।
स्लीपर बोगी के टायलेट में बम के साथ रेलमंत्री के नाम पत्र भी था। यदि बम फटता तो पत्र रखने का कोई फायदा नहीं था। वहीं बीडीसी टीम प्रभारी कौशल किशोर ने बताया कि बम में दो टाइमर लगे थे, लेकिन मेेन तार बम के संपर्क में नहीं था। संभावना है कि इसे जान बूझकर अलग किया गया हो, जिससे बम भी न फूटे और जो संदेश जहां तक जाना है।
वह तक पहुंच भी जाए। पत्र में रेल मंत्री से दस करोड़ की मांग भी की गई। वहीं महानगरी का समय से पहुंचना भी संदेह में है। स्टेशन प्रबंधक जवाहर लाल ने बताया कि महानगरी का समय शाम 5:5 मिनट है, जो गुरुवार को करीब 20 मिनट पहले पहुंच गई थी।