नर्स की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत होने का आरोप लगाकर परिजनों ने जिला अस्पताल में हंगामा किया। उनका कहना है कि अस्पताल से स्टाफ नर्स ने यह कहकर महिला को वापस कर दिया था कि उसे अभी बच्चा नहीं होगा। मौके पर पहुंचे सीएमएस के जांच का आश्वासन देने के बाद परिजन शांत हुए।
कछारपुरवा निवासी रामलखन जायसवाल गर्भवती पत्नी खुशबू (25) को शनिवार रात लगभग नौ बजे जिला अस्पताल ले गया था। वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने खुशबू को बाहर ही लेटा दिया। उसने आरोप लगाया कि रविवार सुबह आठ बजे तक खुशबू कराहती रही।
न तो रजिस्टर में उसकी इंट्री की गई और न उसका इलाज शुरू किया गया। जब स्टाफ नर्स की ड्यूटी खत्म हुई तो उसने खुशबू को दस दिन बाद डिलीवरी होने की बात कह घर ले जाने को कहा। इस पर रामलखन उसे घर ले गया। दोपहर करीब बारह बजे उसने मृत शिशु को जन्म दिया।
इसके बाद खुशबू की हालत बिगड़ने लगी। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल भागे। रामलखन ने आरोप लगाया कि वहां जिस नर्स की ड्यूटी थी, उसने वीआईपी ट्रीटमेंट के नाम पर दो हजार रुपये मांगे। इस दौरान खुशबू की हालत और बिगड़ गई। आधे घंटे बाद इमरजेंसी में भर्ती करने के दौरान खुशबू ने दम तोड़ दिया। प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
उन्हाेंने नर्सों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे सीएमएस पीडी चौधरी ने उन्हें जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन महिला के शव को घर ले गए।
मृत अवस्था में लाए थे परिजन
जब इस संबंध में सीएमएस पीडी चौधरी से बात की गई तो उन्हाेंने बताया कि शनिवार को जब महिला आई थी तो उसे प्रसव पीड़ा नहीं हो रही थी।
परिजन स्वेच्छा से इसे वापस ले गए थे। घर में पता नहीं क्या हुआ, जब बाद में ये लोग महिला को यहां लाए तो वह मृत थी। उन्होंने कहा कि रजिस्टर में इंट्री न करने और पैसा मांगने की बात की जांच की जाएगी। इसके दोषियों को सजा मिलेगी।