चिंतन बैठक में भाजपाइयों की चर्चा का अहम विषय
लक्ष्मीकांत वाजपेयी की अध्यक्षी का कार्यकाल रहा। प्रदेश अध्यक्ष देरी से
आए तो इस बात को और हवा मिली। बैठक के दौरान कई नाम हवा में तैरे तो एक बात
साफ हो गई कि वाजपेयी की पारी का अंत नजदीक आ गया है।
पार्टी के
अंदरखाने की मानें तो यूपी चुनाव में फतह के लिए भाजपा जातिगत समीकरणों पर
फोकस करेगी। रणनीतिकारों ने आलाकमान को यह बात समझाने में सफलता पा ली कि
उत्तर प्रदेश का चुनाव जातिगत आधार पर लड़ा जाता है।
अगर सपा, बसपा की लखनऊ में बारी-बारी से ताजपोशी होती है तो इसकी बड़ी वजह बसपा की दलित वर्ग और सपा का यादव-कुर्मी आदि पर पकड़ है।
पार्टी
के बड़े नेताओं ने आपसी चर्चा में इस बात की पुष्टि भी की। साथ ही
ओमप्रकाश सिंह, धर्मपाल सिंह प्रजापति आदि अरसे से हाशिए पर पड़े अपने
समुदाय में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले दिग्गजों को पूरी तवज्जो दिए जाने से
भी इस तथ्य को बल मिलता है।
पार्टी सूत्रों की मानी जाए तो अब
लक्ष्मीकांत वाजपेयी के उत्तराधिकारी का भी चयन हो चुका है। आलाकमान ने
इसके लिए कई नाम चुन भी लिए हैं, जिस पर मोदी-शाह की मुहर लगनी बाकी है।
चर्चा
के मुताबिक, जिन नामों पर ज्यादा जोर है- वे हैं एमएलसी महेंद्र प्रताप
सिंह, महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह, महामंत्री अनुपमा जायसवाल और उपाध्यक्ष
धर्मपाल प्रजापति।