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Chitrakoot News: लंका फतह के बाद पहुंचे श्रीराम तो मिलने आए देव व महातीर्थ

Sun, 19 Oct 2025 12:58 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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12 सीकेटीपी-7- परिचय-धर्मनगरी का दीपदान मेला में श्रद्धालुओं के आकर्षण के लिए रामघाट मार्ग पर स
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चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में पांच दिवसीय दीपोत्सव की धूम धनतेरस के साथ शुरू हो चुकी है। विजय उत्सव का अद्भुत नजारा मंदाकिनी किनारे रामघाट से लेकर कामदनाथ मंदिर तक देखने को मिल रहा है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने जब अभिमानी रावण का वध कर लंका फतह की, तो पुष्पक विमान सीधे मंदाकिनी तट के रामघाट पर उतरा। यहां उन्होंने दीपदान कर विजय उत्सव मनाया। यही दीपदान परंपरा आगे चलकर दीपावली पर्व के रूप में स्थापित हुई। कहा जाता है कि उस समय प्रभु श्रीराम के इस विजय उत्सव के साक्षी बनने ब्रह्मांड के सभी देवता, महातीर्थ और ऋषि-मुनि चित्रकूट पधारे थे।
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दीपोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से चित्रकूट पहुंचते हैं। ब्रह्मपुरी स्थित पावन मंदाकिनी तट पर भगवान श्रीराम के साथ दीपावली मनाने के लिए देवता, ऋषि, महातीर्थ और तीर्थराज चित्रकूट आए थे। ब्रह्मपुराण के अनुसार, इसी तट पर ब्रह्मा ने यज्ञवेदी स्थापित कर तपोवन के महाराजा मत्तगजेन्द्रनाथ की पूजा-अर्चना की और भगवान कामदनाथ के स्वरूप को प्रतिष्ठित किया।

कथा वाचक आचार्य नवलेश दीक्षित बताते हैं कि श्रीराम ने भ्राता लक्ष्मण, माता सीता और भक्त हनुमान के साथ दीपदान कर दीपावली का पर्व मनाने की परंपरा शुरू की थी। उनके साथ उपस्थित देवताओं और महातीर्थों ने भी मंदाकिनी किनारे पूजन किया। इसी दिन श्रीराम पुष्पक विमान से माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और भक्त हनुमान के साथ अयोध्या लौटे थे।
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श्रीकामदगिरी के विभिन्न नाम

धर्मनगरी में स्थित भगवान कामदनाथ और कामदगिरी पर्वत को भगवान राम का ही स्वरूप माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण में श्रीकामदगिरी को त्रिकूट पर्वत कहा गया है। पद्मपुराण में इसका उल्लेख नील पर्वत के रूप में और श्रीमद्भागवत में कामनाओं की पूर्ति करने वाले पर्वत के रूप में मिलता है। इसे संकर्षण पर्वत, अंगद पर्वत, श्रीपर्वत, नैऋत्यकोण पर्वत, पांचजन्य पर्वत, शारंग पर्वत, वज्र पर्वत, दुर्गा पर्वत, शिलापुरी पर्वत, गोवर्धन पुण्यजनाश्रम, गृद्धक पर्वत, मणिकूट पर्वत, बेधक वन और हनुमान धारा से उद्गमित हनुमान गंगा के रूप में भी जाना गया है।

अनेक तीर्थों का उल्लेख

मान्यता यह भी है कि श्रीराम के दर्शन के लिए महातीर्थ मानसरोवर और तीर्थराज प्रयाग के साथ नैमिषारण्य, धर्मारण्य, वाराणसी, श्रीगिरि, केदार, इन्द्रधुमन सरोवर, स्वामी कार्तिकेय, सालिग्राम, श्रीहरि प्रभृति, विंध्य, कालिंजर, गंगाद्वार, उज्जैनी, अयोध्या, मथुरा, द्वारका, त्र्यंबकेश्वर, प्रभासक्षेत्र, बदरिकाश्रम, गयाक्षेत्र, ओंकार क्षेत्र, पुरुषोत्तम क्षेत्र, गोकर्ण, भृगुक्षेत्र, भृगुतुंग, पुष्कर, अंगना, देवांगन, पम्पापुर, बांकेसिद्ध, मडफा, अमरावती, धारकुंडी, रामशय्या सहित तीर्थराज उत्तर मानसतीर्थ, सागर, अग्नितीर्थ, सत्यतीर्थ, दयातीर्थ, इन्द्रिय निग्रहतीर्थ, आर्जव, विनम्रता तीर्थ, ब्रह्मचर्य तीर्थ, यज्ञतीर्थ, ज्ञानतीर्थ, विज्ञानतीर्थ, धृति तीर्थ, मानसतीर्थ, भार्गव तीर्थ, ब्रह्मांड भेदक तीर्थ, सम्भेद तीर्थ, साकेत तीर्थ और प्रमोद वन तीर्थों का आगमन चित्रकूट में हुआ था।

देवगण, ऋषि और महर्षि

दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास बताते हैं कि वशिष्ठ रामायण और श्रीरामचरित मानस में दीपोत्सव के पावन पर्व पर चित्रकूट में भगवान श्रीराम से मिलने ब्रह्मा, शंभु, सूर्य, वसु, साध्य, मरुतगण, अश्विनी कुमार, इंद्र, चंद्र, सिद्ध, गंधर्व, वशिष्ठ, वामदेव, भरद्वाज समेत अनेक देवगणों, ऋषियों और महर्षियों के आगमन का उल्लेख मिलता है।

12 सीकेटीपी-7- परिचय-धर्मनगरी का दीपदान मेला में श्रद्धालुओं के आकर्षण के लिए रामघाट मार्ग पर स

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