मंगलवार देर शाम बारातियों से भरी बस पलटने से दूल्हे के भाई समेत दो की मौत होने के बाद शादी टाल दी गई है। बुधवार को दोनों पक्ष का पूरा परिवार पोस्टमार्टम हाउस के पास दिनभर बिलखता रहा। दूसरा मृतक बैंडबाजा कर्मी था।
बता दें कि बांदा के अरवारी मरका गांव से मंगलवार रात पहाड़ी के कपना जा रही बारातियों से भरी बस हरीसनपुर के पास अनियंत्रित होकर पलट गई थी। जिसमें दो की मौत हो गई थी व एक दर्जन बाराती घायल हो गए थे। घटना की जानकारी होते ही वधू पक्ष के घर भी कोहराम मच गया।
मृतकों में दूल्हे का सगा भाई रामसरन के भी शामिल होने से शादी टाल दी गई। वर-वधू पक्ष के लोग भी रात को ही जिला अस्पताल पहुंचे। घायलों में प्रभुदयाल, धर्मपाल, लक्ष्मीकांत, सरयूप्रसाद, संतोष कुमार, गुड्डू, बबलू, रामदयाल, रमेश कुमार, तीरथ प्रसाद व इमरान आदि को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसमें सभी को इलाज के बाद बुधवार को घर भेज दिया गया।
बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस में दोनों मृतकों के परिजन व लड़की पक्ष के लोग भी दिनभर रोते बिलखते रहे। उधर, पहाड़ी थानाध्यक्ष रामेंद्र तिवारी ने बताया कि बस चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बारातियों को लाने की थी जिम्मेदारी
चित्रकूट। मंगलवार को अरवारी के लोटन के पांच पुत्रों में पांचवें नंबर के शंकर की बारात कपना के संतोष की पुत्री गीता के घर जा रही थी। दूल्हा तो बोलेरो से पहले पहुंच गया, लेकिन बारातियों को लाने की जिम्मेदारी उसके भाई रामसरन पर थी। इस कारण वह बस से आ रहा था। बस मरका के सिकंदर की बताई गई है।
लेनदेन को लेकर हुआ था विवाद
चित्रकूट। मृतक के भाई श्रीराम ने बताया कि जब शाम को अरवारी से बारात चली, तो बस चालक व मालिक ने पहले पूरे रुपये जमा करने को कहा। रुपये न देने पर बारात न ले जाने की धमकी दी। बस में बाराती बैठे थे और एडवांस पांच हजार भी दिए थे। इसके बाद फिर पांच हजार दिए लेकिन बस मालिक तैयार नहीं हुआ। इसी को लेकर कहासुनी हुई फिर बस आगे बढ़ पाई थी।
शव से लिपटकर रोए
हादसे में दूसरा मृतक फूलचंद्र बैंडबाजा कंपनी में कर्मचारी था। बस में पूरी बैंड पार्टी बैठी थी। घटना की जानकारी होते ही, उसकी पत्नी रेशमा व इकलौता पुत्र बबलू पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव से लिपटकर रोते रहे।
मायूस होकर देखती रही मेंहदी
चित्रकूट। कपना के संतोष की बड़ी पुत्री गीता के विवाह की तैयारियां एक माह से चल रही थीं। सूखे के बावजूद संतोष ने किसी तरह कर्ज लेकर बारातियों के स्वागत की तैयारियां की थीं। तीन बहन, दो भाइयों में सबसे बड़ी गीता ने भी बड़े अरमान से दोनों हाथों में मेंहदी लगवाई थी। उसे उम्मीद नहीं थी कि मेंहदी को देखने के लिए बाराती घर तक नहीं पहुंच पाएंगे। मृतक के पिता के अनुसार, शादी चार माह के लिए टाल दी गई है। गीता ने भी कहा कि उसे शादी की तिथि बढ़ाने से कोई दिक्कत नहीं है, वह पिता की मर्जी से ही शादी उसी घर में करेगी।