चित्रकूट। सदर ब्लाक के रसिन गांव में 52 दिन की जल कोष यात्रा का समापन पद्म विभूषण जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने किया। कहा कि इस प्रकृति पर जो कुछ भी दिख रहा है काया, माया, छाया, वह सब बूंदों का कमाल है। पानी संरक्षण पर सभीको अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। संतो के उपदेश भी पानी के महत्व को बताते हैं।
सोमवार को यात्रा के दौरान आचार्य ने कहा कि हम सबको पानी के एक-एक बूंद को बचाना होगा। पानी बनाया नहीं केवल बचाया जा सकता है। दुनिया में जल संकट है। संतों, ऋषि मुनियों ने सभी धर्म शास्त्रों की रचना नदी के किनारे वृक्ष के नीचे की है। जल कोष यात्रा के संयोजक जल योद्धा पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने कहा कि 10 जिले 26 ब्लॉक 550 गांव तक जल कोष यात्रा का संदेश गया है। आज यह यात्रा चित्रकूट की पवित्र भूमि में कुछ समय के लिए विराम ले रही है। उन्होंने कहा कि जल राष्ट्रीय सम्पदा हैं, प्रकृति ने हमें उपहार में निशुल्क जल प्रदान किया है। हमने अपने स्वार्थ की वजह से विकय की वस्तु बना दिया। किसान अपने खेतों की मेड बंदी करें और मेड पर औषधीय पेड लगायें।
मुख्य विकास अधिकारी अमृत पाल कौर ने कहा कि हम सबको मिलकर राज्य, समाज, सरकार तीनों को मिलकर सामुदायिक प्रयास करने होगें। सरकार की योजनाओं के साथ सामूहिक जिम्मेदारी एक बडा परिणाम लाती है। अभियान संस्था के निदेशक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि जल जंगल जमीन हमारे जीवन से जुडे मूलभूत आवश्यकता है। नवीन विधि माइको इरीगेशन के विशेषज्ञ विवेक कुमार सिंह ने कहा कि हम ऐसी फसलें पैदा करें जिसमें पानी कम लगता हो। अटल भूजल योजना के राज्य नोडल अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि ने कहा कि बुंदेलखंड में जल चौपाल, जल चर्चा, जल क्रांति जैसे कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर होते रहना चाहिये। बुंदेलखंड में पानी रोकने के परंपरागत उपाय के साथ नये उपाय भी किये जाने चाहिये।