मजदूरी न मिलने से बैंक के बाहर खड़ीं महिला मजदूर।
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मनरेगा योजना के तहत किये गये कार्य की मजदूरी तो मजदूरों के खाते में है लेकिन नोट बंदी का असर है कि कई बार बैंक के चक्कर लगाने के बावजूद मजदूरों को रुपये नहीं मिल रहे। जिससे मजदूर परिवारों की स्थिति खराब हो रही है। मजदूर बार-बार बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।
जिले में मनरेगा योजना के तहत होने वाले कार्याें की मजदूरी पाने को वैसे भी मजदूर, ठेकेदार, ग्राम प्रधान और ब्लाक प्रमुख परेशान रहे। सभी का कहना है कि शासन स्तर से ही धनराशि नहीं आ रही है। अब खातों में मजदूरी की रकम आ गई है
लेकिन नोट बंदी की समस्या मजदूरों के सामने खड़ी हो गयी। जब खाते से धनराशि को निकालने मजदूर पहुंचे तो बैंकों में धनराशि न होने की बात बताई जाती है। मनरेगा के तहत कार्य करने वाले भरर्कोरा गांव के माया, बुधिया, भोला, गनेशिया, कोदिया, सोना, शरद, चंद्रशेखर आदि ने बताया कि बैंक में कैश न होने पर उन्हें लौटा दिया गया।
उन्होंने बताया कि मई माह से मनरेगा की धनराशि नहीं आ रही थी। जिससे वह पहले से ही परेशान थे। अब खाते में रुपये आ गए हैं। फिर भी निकाल नहीं पा रहे हैं।