फोटो05सीकेटीपी-3-परिचय- बौद्धिक संपदा कार्यक्रम की बैठक में मौजूद समाजसेवी व समर्थक ।संवाद
चित्रकूट। भारत रत्न संत विनोबा भावे के 131 वें जन्मदिन पर चित्रकूट लोकनीति विचार मंच में बौद्धिक संपदा कार्यक्रम हुआ। इसमें वर्तमान समय की चुनौतियां व उनके समाधान को लेकर चर्चा की गई।
मंदाकिनी नदी किनारे आयोजित कार्यक्रम में समाजशास्त्री पुरुषोत्तम ने कहा कि जय जगत का नारा संत विनोबा भावे ने 1952 में दिया था, जब वह भूदान यज्ञ के लिए गांव गांव पदयात्रा कर रहे थे। आजादी के बाद ही लोग एक दूसरे की हत्या करने लगे। सरकार भी समस्या का समाधान नहीं कर पाई थी।
तब विनोबा भावे ने लोगों को एक साथ जोड़ने के लिए निवेदन किया था। उन्होंने जाति, धर्म, गरीबी, अमीरी के भेद भाव को कम करने का संकल्प दिलाया था। सामाजिक चिंतक राम मनोहर वर्मा ने कहा कि जय जगत और एक पृथ्वी एक परिवार है। यह दोनों नारे मानवता की रक्षा के लिए सबसे बड़ा मंत्र है।
समाजशास्त्री शिक्षक कवि दिनेश चौहान ने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता इन दोनों के बीच बहुत बड़ी खाई पैदा हो चुकी है जिसका सबसे बड़ा कारण है बाजारवाद। हनुमान प्रसाद निर्मल ने कहा कि रामकाज कीन्हे बिना मोहि कहां विश्राम। कहा कि हम सब लोगों को समाज के अंतिम पायदान में रहने वाले लोगों के बीच में जाना चाहिए, ताकि हम उनकी आवाज को बड़ी बना सके।