फोटो-8- मऊ के बाबा पठान क्षेत्र के जंगल में लगी आग । संवाद
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बरगढ़/मऊ (चित्रकूट)। चित्रकूट जिले के जंगलों में लगी आग पिछले 24 घंटों में पांच किलोमीटर क्षेत्र तक पहुंच गई है। आलम यह है कि देवांगना घाटी की हवाई पट्टी से सटे जंगल में आग की लपटें दो किमी तक उठ रहीं हैं। वहीं बरगढ़ क्षेत्र के बंबुरी ग्राम पंचायत के पाठन बाबा के जंगल और मऊ क्षेत्र के खंडेहा के दानू आश्रम के जंगल के पांच किमी के क्षेत्र को आग ने चपेट में ले लिया है। देवांगना घाटी के पास लगी आग प्राचीन बांके सिद्ध आश्रम के पास तक पहुंच गई है। पास में सिद्धपुर व बनाड़ी गांव भी पड़ता है, जिसके चलते ग्रामीणों को चिंता हो रही हैं। यदि आग इसी तरह बढ़ती गई तो गांव भी चपेट में आ सकता है। उधर, आग से लाखों रुपये की वन संपदा भी जल गई है। जबकि कई छोटे जीव-जंतु भी इसकी चपेट में आकर जान गवां चुके है।
बताते चलें कि जंगल में आग सोमवार की सुबह लगी थी। इसके बाद देवांगना घाटी की हवाई पट्टी के पास स्थित जंगल में मंगलवार की सुबह आग लग गई। आग ने पेड़ पौधे को अपनी चपेट में ले लिया है और वह धू-धूकर जल रहे है। धुएं के गुबार जंगल में दूर-दूर तक दिखाई दे रहे है। ग्रामीणों का माना है कि यह आग कई किमी तक फैली हुई है। बरगढ़ वन क्षेत्र के बंबुरी ग्राम पंचायत के पाठन बाबा के जंगल में लगी आग तेज हवा के चलने से फैलती जा रही है। वहीं मऊ क्षेत्र खंडेहा के दानू बाबा आश्रम के पास के जंगलों में भी आग लग गई है। आग की लपटे जंगल में चारो ओर फैल रही है। जंगल के पास स्थित खंडेहा व पियरा गांव भी पड़ता है। मौके पर एसडीएम नवदीप शुक्ला व वन विभाग की टीम पहुंचकर आग बुझाने का कार्य कर रही है।
डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि आग बुझाने में कर्मचारी लगे है। मौके पर दमकल की गाड़ी लगी है। उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की भी मदद ली जा रही है। तेज हवाएं चलने से आग बुझाने में अड़चन हो रही है। आग नियंत्रण के सभी उपाय किए जा रहे हैं।
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एक बार सेना बुलानी पड़ी थी
गर्मी आते ही आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है। अभी मार्च शुरू हुआ है और कम से कम सात स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। ढाई साल पहले देवांगना घाटी के जंगलों में आग लग गई थी। जिसे बुझाने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी थी। सेना के हेलीकाप्टर के माध्यम से आग को बुझाया गया था। तत्कालीन डीएम विशाख जी अय्यर के प्रयास से दो हेलीकाप्टरों ने हवाई सर्वे किया फिर देवांगना हवाई पट्टी से एक हेलीकाप्टर ने जंगल की आग पर नियंत्रण किया था। इस घटना में भी लगभग दस किमी जंगल के दायरे की करोड़ों रुपये की वन संपदा नष्ट हुई थी। साथ ही कई छोटे जीव-जंतुओं की मौत हुई थी।
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वन रक्षक नहीं करते हैं सही ड्यूटी
जिले में विंध्याचल पर्वत की श्रंखलाएं हैं। इससे जुड़े कई जंगल है। जिसमें बरगढ़ क्षेत्र से लेकर भरतकूप क्षेत्र तक जंगल फैला हुआ है। इन जंगलों के आसपास सैकड़ों गांव भी बसे हुए है। इसके अलावा प्राचीन आश्रम भी है। जंगलों में जलती बीड़ी फेंकने व झाड़ियों में आग लगा देने से जंगल में आग भड़कती है। ग्रामीण सुरेश कुमार, महेश चंद्र, लवलेश आदि का कहना है कि वन रक्षक अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं करते। जिसकी वजहा से घटनाएं होती है।