क्षेत्र में पेयजल संकट बढ़ा तो हड़बड़ाए ग्रामीणों को विलुप्त हो रही छोटी गुंता नदी को सहेजने का ध्यान आया। कोई अकेले तो इस काम को नहीं कर सकता था। ऐसे में चर्चिच फिल्मी गीत एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना...से प्रेरणा लेकर रामनगर ब्लाक क्षेत्र के दो दर्जन के करीब प्रधान व युवाओं ने वह कारनामा कर दिया। यह काम जिले समेत बुंदेलखंडवासियों के लिए प्रेरक बन सकता है। एक सप्ताह के अंदर क्षेत्र के युवाओं ने खुद फावड़ा चलाकर और जेसीबी चलवाकर विलुप्त नदी के स्त्रोतों को खोजकर पानी निकाल लिया।
रैपुरा क्षेत्र से निकली गुंता नदी छीबाें की ओर दस किमी तक आसपास के दो दर्जन गांवों के लोगों की प्यास बुझाती थी। जलस्तर लगातार नीचे जाने और कम बारिश के साथ ही स्थानीय प्रदूषण के चलते यह छोटी गुंता नदी विलुप्त होने लगी थी। इस साल सूखे और पेयजल संकट से क्षेत्रवासी परेशान हो गए।
होली के दिन छीबाें प्रधान कुसुम मिश्रा के आवास पर स्थानीय लोगों के साथ समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर सिंह यादव, जिला पंचायत सदस्य सिद्धार्थ पांडेय, पूर्व ब्लाक प्रमुख जयप्रकाश पांडेय, पूर्व डीडीसी अर्जुन शुक्ला और युवा समाजसेवी मोनू मिश्रा आदि ने पेयजल संकट पर चर्चा की।
उसी दौरान बताया कि गुंता नदी का पानी कभी खत्म नहीं होता था, लेकिन इस बार के हालात अलग हैं और कई जल स्त्रोत बंद हो गए हैं, इससे नदी का पानी लगभग खत्म हो गया है। अमरपुर, पियरियामाफी, गोबरौल, अतरसुई और छीबाें की ओर तो पानी नहीं दिखाई पड़ता।
यही बनी नदी मार्ग पर खुदाई की योजना- यहीं तय हुआ और जल स्त्रोत तलाशने से लेकर नदी मार्ग की खुदाई कराने की योजना बनी। 15 दिनों तक युवा दिनरात मिलजुल कर जल स्त्रोत के लिए चंदा कर जेसीबी और फावडे़ लेकर नदी मार्ग पर डटे रहे। आखिरकार शनिवार सुबह वह घड़ी आई। अमरपुर से लेकर छींबो के पास जल स्त्रोत मिला और नदी की धार आगे बढ़ गई। यह देखकर सभी ग्रामीण अति प्रसन्न हुए। कई लोग तो बाल्टी में पानी लेकर घरों की ओर गए। मटमैला पानी होने के बावजूद लोगों की आंखों में पानी मिलने की चमक थी।
ग्रामीणों ने युवाओं के प्रति जताई कृतज्ञता- ग्रामीणों ने इस प्रयास में जुटे ज्ञानेंद्र मिश्रा, अनिल मिश्रा, जयप्रकाश मिश्रा, राजकुुमार, राधाकृष्ण, रामबाबू, विनय, प्रभाकर मिश्रा, हरिहरण, अतुल, मिथलेश और विजय पांडेय आदि का ग्रामीणों ने आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस नदी के जलस्त्रोत मिलने से पानी की कुछ समस्या का समाधान हो सकेगा, लेकिन आगे भी इसकी खुदाई की जरूरत है।