कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन के सहयोग से महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय वाल्मीकि समारोह का आयोजन किया गया। इसमें विशिष्ट अतिथि विवि के प्राध्यापक डा. अमरजीत सिंह ने कहा कि वाल्मीकि ज्ञान के साथ विज्ञान के भी विशेषज्ञ थे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महर्षि वाल्मीकि की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. कपिलदेव मिश्र ने कहा कि समाज और धर्म से भी ऊपर राष्ट्र है और इस पर कुदृष्टि डालने वाले का सामना कैसे करना चाहिए, इसकी शिक्षा रामायण से मिलती है। इसके पूर्व सरस्वती वंदना, कुल गीत व अटल शुक्ला के भजनों से वाल्मीकि समारोह का शुभारंभ हुआ।
संगीत विभाग के डॉ. विवेक फड़नीस, डॉ. दादूराम, अवधेश यादव के साथ इंदुजा दुबे, अंजना ओझा, दिव्या पांडेय ने भजन प्रस्तुत किए। स्वागत भाषण में डॉ. कमलेश थापक ने रामकथा की विश्व यात्रा पर प्रकाश डाला। कालिदास संस्कृत अकादमी के सह निदेशक डॉ. संतोष पांडया ने वाल्मीकि समारोह की सफल यात्रा के बारे में बताया। समारोह की संयोजक और संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा मिश्र ने राम , रामकथा और महर्षि वाल्मीकि के अंतर संबंधों पर प्रकाश डाला। समारोह के अंतर्गत आयोजित शोध संगोष्ठी में दो शोध सत्र हुए।
प्रथम सत्र में उज्जैन के डॉ तुलसी दास परौहा आदि ने शोध आलेखों का वाचन किया। द्वितीय शोध सत्र डॉ. प्रज्ञा मिश्रा की अध्यक्षता में हुआ। इसमें डॉ. स्वर्ण लता शर्मा, प्रो. कपिलदेव मिश्र, डॉ. कमलेश थापक, निर्मल प्रसाद, डॉ. सरदार दिवाकर, डॉ. प्रमिला मिश्र, डॉ यमुना प्रसाद झा, प्रियंका श्रीवास्तव, पूनम देवी , दुर्गेश सिंह , गुरु कृपा द्विवेदी आदि के वाल्मीकि पर केंद्रित शोध आलेख प्रमुख रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि राम संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं।