फोटो- 4- चित्रकूट में पत्रकारों से बातचीत करते जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गि
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चित्रकूट। जूना अखाड़ा हरिद्वार रुड़की के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने पत्रकारों से बातचीत में कहा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों के हिस्से में आने के कारण चित्रकूट जिले का विकास नहीं हो पा रहा है। इसका पूरा हिस्सा उ.प्र. को मिलना चाहिए ताकि सही रूप से विकास हो सके। क्षेत्र को अलग केंद्र शासित की श्रेणी में रखकर संचालित किया जाना चाहिए। तीर्थ क्षेत्र की पौराणिक मर्यादा से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। साथ ही नदियों के किनारे हो रहे पक्के निर्माण को विनाश का प्रतीक बताया। धर्मनगरी स्थित शिवहरे धर्मशाला में शनिवार को महामंडलेश्वर ने कहा कि मां मंदाकिनी को गंदा करने वालों के खिलाफ प्रशासन कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही नमामि गंगे की तर्ज पर मां मंदाकिनी का सफ ाई अभियान चले। चित्रकूट उप्र का तीर्थ क्षेत्र है। दो प्रदेशों के बीच में होने के कारण यहां का विकास अधर में लटका है। केंद्र सरकार क्षेत्र के साथ न्याय करे। साथ ही बताया कि वे विकास विरोधी नहीं है।
नदियां प्राकृतिक संपदा है, इसमें जलस्रोत एवं सहायक नदियां जुड़ी होती हैं। नदियों के किनारे कंक्रीट निर्माण न करें। उन्होंने कहा कि नदियों में जुडे़ नोलों का दोषी जिला प्रशासन है। महामंडलेश्वर स्वामी गिरि ने चित्रकूट को भारतीय संस्कृति का विशेष तीर्थ बताया। उन्होंने चित्रकूट को एक क्षेत्र घोषित करने पर जोर दिया। बताया कि राम जन्म भूमि ट्रस्ट अच्छा काम कर रहा है। वह मंदिर निर्माण के लिए राशि एकत्रित करने गांव-गांव जाएंगे।
प्रकृति के साथ न हो छेड़छाड़
चित्रकूट। महामंडलेश्वर ने कहा कि आधुनिक संस्कृति वन्य जीवों के साथ खिलवाड़ कर रही है। तीर्थ क्षेत्र में बंदरों का आतंक है। इससे श्रद्धालु भयभीत रहते हैं। साथ ही तीर्थ क्षेत्र में भी नुकसान होता है। वन्यजीवों को प्रकृति ही पालती है और प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
विधिविधान से हो आरती
चित्रकू ट। तीर्थ क्षेत्र की जो पुराणों में मर्यादा है इसमें दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शाम को आरती के समय रूद्राष्टक के हिसाब से पूजन होना चाहिए। हाल ही मेें मंदाकिनी आरती के बदले स्वरूप को लेकर उन्होंने कहा कि यदि बदलाव करना है तो तीर्थक्षेत्र के सभी साधुसंताें व जानकारों की सहमति होनी चाहिए।